बांग्लादेश, खासकर ढाका, में डेंगू का प्रकोप गंभीर हो गया है, जिससे अस्पताल मरीजों से भर गए हैं और लोगों को फर्श व बरामदों पर इलाज कराना पड़ रहा है।
फर्श पर इलाज कराने के लिए मजबूर लोग (तस्वीर-सोशल मीडिया)
ढाका में डेंगू से अस्पताल भरे, मरीज फर्श पर।
इस साल 59,000 से अधिक डेंगू मरीज भर्ती।
अक्टूबर में डेंगू मामले बढ़ने की आशंका।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश इन दिनों डेंगू की मार झेल रहा है। राजधानी ढाका और उसके आसपास के इलाकों में इसका प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मरीजों को अस्पताल में जगह तक नहीं मिल पा रहा है।
अस्पतालों में बेड कम पड़ जाने के कारण लोग फर्श और बरामदों पर अपना इलाज करान के लिए मजबूर हैं। स्वास्थ्य निदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से लेकर अब तक 59000 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं, जबकि अकेले सितंबर के शुरुआती 18 दिनों में 79 लोगों की जान जा चुकी है।
मिली जानकारी के अनुसार ढाका के प्रसिद्ध मुग्दा जनरल अस्पताल में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। इस अस्पताल के डेंगू वार्ड की कुल क्षमता सिर्फ 38 बेड की है, लेकिन वहां 145 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। स्थिति यह है कि एक ही बेड पर कई मरीज लेटे हैं, और जो जगह बच रही है वहां फर्श और बरामदे में मरीजों को ड्रिप लगाई जा रही है।
रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ ढाका ही नहीं, बल्कि नारायणगंज और अन्य जिलों से भी गंभीर हालत में मरीज यहां पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों और नर्सों का कहना है कि भारी भीड़ के कारण मरीजों की सही से देखभाल करने और आपातकालीन सेवाएं देने में काफी कठिनाई आ रही है।
बता दें कि डेंगू का यह प्रकोप अब सिर्फ राजधानी ढाका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी पैर पसार चुका है। हालिया आंकड़े के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे देश में 747 नए मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं।
ढाका डिवीजन में 216, चटगांव में 180, मयमनसिंह में 92, और खुलना में 81 नए मरीज सामने आए हैं। इस साल का सबसे बुरा महीना अगस्त रहा, जिसमें 20,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए और 43 लोगों की मौत हुई।
इतना ही नहीं कीट विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति अभी और गंभीर हो सकती है। मौसम के बदलाव के साथ भले ही मच्छर कम दिखें, लेकिन खतरा टला नहीं है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अक्टूबर महीने में डेंगू के मामले और ज्यादा बढ़ सकते हैं। उन्होंने जनता से मच्छरों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और नियंत्रण के कड़े उपाय करने की अपील की है।
स्वास्थ्य निदेशालय (DGHS) के महानिदेशक का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में क्षमता पूरी हो जाती है, तो मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजा जाएगा। इसके अलावा जिला और उपजिला स्तर पर भी इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मरीजों का इलाज करना काफी नहीं है, बल्कि एडीज मच्छरों के पनपने की जगहों को पूरी तरह नष्ट करना ही इस बीमारी से बचने का एकमात्र स्थायी उपाय है।