झांसी में हिंदी दिवस पखवाड़े के मौके पर मातृभूमि सेवा मिशन की झांसी इकाई ने भाषा संवाद और परिचर्चा कार्यक्रम किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मातृभूमि सेवा मिशन धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र थे। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस सिर्फ भाषा का उत्सव नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय पहचान का प्रतीक है।
डॉ. मिश्र ने बताया कि आज हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि रोजगार, तकनीक, पत्रकारिता और संस्कृति की नई संभावनाओं का रास्ता बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी का संरक्षण और इसे आगे बढ़ाना हर भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय समुदाय ने हिंदी को जिंदा रखने में बहुत योगदान दिया है।
डॉ. मिश्र ने बताया कि मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, खाड़ी देशों, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में बसे भारतीयों ने समाचार-पत्रों, रेडियो और सांस्कृतिक संस्थाओं के जरिए हिंदी की जड़ों को मजबूत किया है। इसी वजह से आज अमेरिका, रूस, जापान, यूरोप और अफ्रीकी देशों के विश्वविद्यालयों में भी हिंदी पढ़ाई जा रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी राष्ट्रभक्त संगठन और हिन्दू समन्वय मंच के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अर्जरिया ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी आज भी देश की सांस्कृतिक एकता और पहचान की अहम कड़ी है। दुनिया भर में करीब 60 करोड़ लोग इसे बोलते हैं। अति विशिष्ट अतिथि व्यवसायी और समाजसेवी सर्वेश पटेल ने बताया कि संविधान बनाने वालों ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था। अनुच्छेद 343 में साफ किया गया है कि हिंदी देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा होगी।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती ऊषा सचान ने किया और आभार श्रीमती मीनू सोनी ने जताया। इस मौके पर देहरादून इकाई के संयोजक दिनेश छारी और कार्यकारी मंडल सदस्य डॉ. रामकुमार गुप्ता समेत कई हिंदी प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।
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