Shubham Raja
Date: 21-09-26 17:06
Russia North Korea Drones: रूस में बन रहे गेरान ड्रोन को लेकर चिंता अब सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर रूस ने इन ड्रोन या इनसे जुड़ी तकनीक को उत्तर कोरिया तक पहुंचा दिया, तो कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य संतुलन पर इसका क्या असर होगा. रूस के तातारस्तान में मौजूद अलाबुगा ड्रोन फैक्ट्री में बड़ी संख्या में उत्तर कोरियाई कामगारों के पहुंचने की खबरों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है.
अलाबुगा स्पेशल इकोनॉमिक जोन में बड़े स्तर पर ड्रोन का उत्पादन होता है. यहां गेरान क्लास के ड्रोन भी बनाए जाते हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर कोरिया से बड़ी संख्या में कामगार यहां पहुंच रहे हैं.
स्टूडेंट वीजा पर भेजे जा रहे मजदूर
चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि इन कामगारों को ड्रोन बनाने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी तकनीक की जानकारी मिल सकती है. हालांकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि रूस उत्तर कोरिया को गेरान ड्रोन या उनकी उत्पादन तकनीक देने जा रहा है.
लेकिन अगर ऐसा होता है तो इसका असर रूस-यूक्रेन युद्ध से आगे तक जा सकता है. बताया गया है कि इन कामगारों को स्टूडेंट वीजा के जरिए रूस भेजा गया है, जिससे संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचने की कोशिश की जा सके. अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान और दूसरे देशों से जुड़े बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी समूह की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस में ड्रोन उत्पादन से जुड़े काम में 25,000 तक उत्तर कोरियाई नागरिक शामिल हो सकते हैं. अलाबुगा भी ऐसे ठिकानों में शामिल है.
रूस यूक्रेन के खिलाफ गेरान ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है. इनमें गेरान-2 सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले मॉडलों में शामिल है. अब गेरान-5 को लेकर भी चर्चा बढ़ी है. बताया जाता है कि यह ड्रोन करीब 600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और लगभग 90 किलो का हथियार ले जा सकता है. इसकी तेज रफ्तार के कारण इसे रोकना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में अगर इसकी तकनीक उत्तर कोरिया तक पहुंचती है, तो दक्षिण कोरिया और जापान के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है.
निशाने पर आ सकती हैं फैक्ट्रियां
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सैन्य ब्लॉग रायबर ने संभावित खतरे को लेकर दक्षिण कोरिया और जापान के कई अहम ठिकानों का जिक्र किया है. इनमें दक्षिण कोरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी शामिल हैं.
दक्षिण कोरिया का बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी चिंता का कारण हो सकता है. सीमा के पास सैमसंग के बड़े उत्पादन केंद्र हैं. वहीं जापान में तेल भंडारण केंद्र, रिफाइनरी, बंदरगाह और बड़े औद्योगिक ठिकाने मौजूद हैं.
रायबर के विश्लेषण के मुताबिक, अगर उत्तर कोरिया को लंबी दूरी तक हमला करने वाले ड्रोन की क्षमता मिलती है तो सैन्य ठिकानों के अलावा ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे भी संभावित निशाने बन सकते हैं. हालांकि, यह उत्तर कोरिया की घोषित योजना नहीं है, बल्कि रूसी सैन्य ब्लॉग का विश्लेषण है.
सैमसंग से लेकर टोयोटा तक क्यों बढ़ी चिंता?
दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था बड़े औद्योगिक और तकनीकी उत्पादन पर काफी निर्भर है. इसलिए किसी बड़े हमले की स्थिति में सैन्य ठिकानों के अलावा कारखाने, बिजली संयंत्र, तेल भंडार और बंदरगाह भी अहम हो सकते हैं.
जापान में भी ऐसी ही चिंता है. नागोया जैसे बड़े बंदरगाह और टोयोटा, मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के औद्योगिक ठिकाने देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं.
इसी वजह से गेरान ड्रोन की तकनीक अगर उत्तर कोरिया तक पहुंचती है तो मामला सिर्फ एक नए हथियार के मिलने तक सीमित नहीं रहेगा. इससे दक्षिण कोरिया और जापान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ उनके औद्योगिक ढांचे को लेकर भी खतरे की नई चिंता पैदा हो सकती है.
उत्तर कोरिया के लिए रूस क्यों बन सकता है बड़ा मददगार?
उत्तर कोरिया पहले से ही अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है. दूसरी ओर, रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग भी बढ़ा है. ऐसे में अलाबुगा में उत्तर कोरियाई कामगारों की मौजूदगी को अहम माना जा रहा है.
अगर इन कामगारों को आधुनिक ड्रोन बनाने की तकनीक और तरीका सीखने का मौका मिलता है और यह जानकारी उत्तर कोरिया तक पहुंचती है, तो प्योंगयांग अपनी लंबी दूरी की ड्रोन क्षमता को तेजी से बढ़ा सकता है.
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