Rashmi Singh
Date: 22-09-26 12:29
National Film Awards History: भारतीय सिनेमा में नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स को सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है. हर साल देशभर में बनी फिल्मों, कलाकारों और तकनीशियनों के शानदार काम को इस पुरस्कार के जरिए सम्मानित किया जाता है. आज यानी 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन हो रहा है, जिसमें साल 2024 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मान दिया जाएगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समारोह में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करेंगी.
इस बार कार्तिक आर्यन और ममूटी को बेस्ट एक्टर और यामी गौतम को बेस्ट एक्ट्रेस के सम्मान से नवाजा जाएगा. लेकिन जिस पुरस्कार समारोह पर आज पूरे देश की नजर है, उसकी शुरुआत आखिर कब और कैसे हुई थी? क्या आपको पता है कि पहली बार किस फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला था और बेस्ट एक्टर का पहला पुरस्कार किस अभिनेता ने जीता था? आइए जानते हैं नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के करीब सात दशक लंबे सफर की कहानी.
1954 में शुरू हुआ था पुरस्कारों का सफर
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की नींव आजादी के बाद के दौर में पड़ी थी. साल 1949 में गठित ‘फिल्म इन्क्वायरी कमेटी’ ने भारतीय सिनेमा में कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्मों को पुरस्कार देने की सिफारिश की थी. इसी सिफारिश के बाद साल 1954 में ‘स्टेट अवॉर्ड्स फॉर फिल्म्स’ की शुरुआत हुई.
पहला पुरस्कार समारोह दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें साल 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मानित किया गया. समय के साथ इस पुरस्कार की पहचान और दायरा बढ़ता गया और आगे चलकर ‘स्टेट अवॉर्ड्स फॉर फिल्म्स’ का नाम बदलकर ‘नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स’ कर दिया गया.
पहली बेस्ट फीचर फिल्म बनी थी ‘श्यामची आई’
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के शुरुआती दौर में बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार सबसे प्रमुख सम्मानों में शामिल था. साल 1954 में पहली बार यह सम्मान मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ को दिया गया. फिल्म का निर्देशन पी. के. अत्रे ने किया था.
उस समय पुरस्कारों की कैटेगरी आज की तरह विस्तृत नहीं थीं. कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कारों की शुरुआत बाद में हुई. यानी शुरुआती नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में फिल्म की समग्र उपलब्धि को ज्यादा महत्व दिया जाता था.
1968 में पहली बार मिला बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड
फिल्मों में अभिनय और तकनीकी योगदान को अलग पहचान देने के लिए साल 1967 की फिल्मों से कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कार शुरू किए गए. इसके बाद 1968 में पहली बार बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया.
यह ऐतिहासिक सम्मान बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता उत्तम कुमार को मिला. उन्हें ‘एंथनी फिरंगी’ और ‘चिड़ियाखाना’ में उनके अभिनय के लिए बेस्ट लीड एक्टर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
नरगिस बनीं पहली बेस्ट एक्ट्रेस
पहले बेस्ट एक्ट्रेस के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की बात करें तो यह सम्मान हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नरगिस के नाम रहा. उन्हें फिल्म ‘रात और दिन’ में शानदार अभिनय के लिए यह पुरस्कार दिया गया था.
इस तरह उत्तम कुमार और नरगिस ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के इतिहास में बेस्ट एक्टर और बेस्ट एक्ट्रेस के पहले विजेताओं के तौर पर अपना नाम दर्ज कराया. इसके बाद हर साल फिल्मों और कलाकारों के बेहतरीन काम को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने का सिलसिला आगे बढ़ता गया.
फिल्म महोत्सव निदेशालय से NFDC तक पहुंची जिम्मेदारी
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी साल 1973 में फिल्म महोत्सव निदेशालय ने संभाली थी. कई दशकों तक इसी संस्था के जरिए पुरस्कार समारोह का संचालन किया गया. हालांकि, साल 2022 में फिल्म महोत्सव निदेशालय का राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम यानी NFDC में विलय कर दिया गया.
इसके बाद नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी NFDC के पास आ गई. करीब सात दशक से ज्यादा समय में यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के बदलते दौर, नई प्रतिभाओं और बेहतरीन फिल्मों को राष्ट्रीय मंच देने वाली एक महत्वपूर्ण परंपरा बन चुका है.
आज 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के मंच पर जब एक बार फिर कलाकारों और फिल्मों को सम्मानित किया जाएगा, तो यह समारोह सिर्फ मौजूदा सिनेमा की उपलब्धियों का जश्न नहीं होगा, बल्कि उस लंबी परंपरा की भी याद दिलाएगा जिसकी शुरुआत सात दशक से ज्यादा पहले हुई थी.
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