पहले शहबाज ने मांगी मदद, फिर जयशंकर ने दहाड़कर कहा- 'आतंक की फंडिंग रोको', UN में पाकिस्तान की खोल दी पोल – Bharat24live

Rashmi Singh
Date: 27-09-26 06:04
S Jaishankar UNGA Speech 2026: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद, वैश्विक संघर्ष और ग्लोबल साउथ के सामने मौजूद चुनौतियों पर भारत का पक्ष रखा. अपने संबोधन में उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने की जरूरत बताई और कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके परिणामों से बचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने यह भी कहा कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का अधिकार है.
पाकिस्तान के संदर्भ में जयशंकर का कड़ा बयान
जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि एक दिन पहले महासभा में एक ऐसे देश ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया, जिसे उन्होंने आतंकवाद का “serial practitioner” बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके गंभीर परिणामों से बचने की कोशिश नहीं चल सकती. उनका यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के UNGA संबोधन के एक दिन बाद आया, जिसमें शरीफ ने कश्मीर समेत भारत-पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे उठाए थे.
आतंकवाद की फंडिंग रोकने पर जोर
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई को अहम बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के वित्तीय पहलू को उजागर करने और उसके खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. जयशंकर ने आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले ढांचे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखना जरूरी है.
आत्मरक्षा के अधिकार को लेकर भारत का रुख
जयशंकर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा. उनके बयान का केंद्र यह था कि आतंकवाद और सामान्य कूटनीतिक संबंधों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता. भारत का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और उसके जिम्मेदार नेटवर्क पर दबाव अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.
युद्धों के बीच आम देशों पर पड़ रहा असर
जयशंकर ने अपने भाषण में केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कई बार संघर्ष से दूर रहने वाले देशों और आम लोगों को भी उसका आर्थिक और मानवीय नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और तनाव कम करने की अपील की.
ग्लोबल साउथ के सामने 4F की चुनौती
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के सामने मौजूद आर्थिक और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों को भी रेखांकित किया. उन्होंने 4F—Food, Fuel, Fertilizer और Finance यानी भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. इससे पहले UNGA के दौरान एक अन्य संबोधन में भी उन्होंने कहा था कि इन चार क्षेत्रों से जुड़ी अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और वैश्विक स्तर पर जोखिम कम करने तथा आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है.
भारत ने दुनिया के सामने रखा अपना विकास मॉडल
जयशंकर ने भारत की विकास साझेदारी और संकट के समय मानवीय सहायता का भी उल्लेख किया. भारत पहले भी संयुक्त राष्ट्र के मंच से बता चुका है कि उसने 78 देशों में 600 से अधिक प्रमुख विकास परियोजनाओं पर काम किया है. इन परियोजनाओं में बुनियादी ढांचे से लेकर आजीविका, क्षमता निर्माण और जनकल्याण से जुड़ी पहल शामिल हैं.
संकट के समय ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के तौर पर भारत
विदेश मंत्री ने आपदा और मानवीय संकटों के दौरान भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया. भारत ने अपनी विदेश नीति के तहत पड़ोसी और अन्य देशों को स्वास्थ्य, राहत, खाद्य, ईंधन तथा अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है. UNGA में भारत ने खुद को संकट की स्थिति में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में पेश किया है.
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