Pakur News: प्रखंड मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर बड़कियारी गांव में वर्ष 1968 से प्रारंभ हुई दुर्गा पूजा आज तक अनवरत होती चली आ रही है। दुर्गा पूजा की शुरुआत बड़कियारी गांव के लोकनाथ दत्ता, विश्वनाथ दत्ता, रघुनाथ दत्ता, शंकर भंडारी, हरि भंडारी समेत अन्य ग्रामीणों ने वर्ष 1968 से 1980 तक पूजा-अर्चना की जिम्मेवारी संभाली। वर्ष 1981 से 2007 तक पूजा संपन्न कराने की जिम्मेवारी गांव के फटिक भंडारी, असीम दत्ता समेत अन्य ग्रामीणों ने निभाई। वर्ष 2008 से पूजा संचालन का जिम्मा सार्वजानिक दुर्गा पूजा समिति का है। जिसमें हेमंत दत्ता, प्रशांत दत्ता, गोरा दत्ता, अरुण भंडारी, राजेन दत्ता, भूतनाथ भंडारी सहित अन्य सदस्यों की महती भूमिका रही। वर्ष 2026 में पूजा के सफल संचालन के लिए सार्वजानिक दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष के रुप में राजेन दत्ता, सचिव अरूण कुमार ठाकुर, कोषाध्यक्ष सुखेन भंडारी तथा व्यवस्थापक के रुप में हेमंत दत्ता, रामचंद्र साहा, विजय भंडारी, सहित राजीव साहा, दुर्गा भंडारी, विनोद भंडारी, आशीश दत्ता, सोमेन दत्ता, सुशांतो दत्ता, गोपाल दत्ता, भूतनाथ भंडारी, धनंजय भंडारी व अन्य सदस्यों के जिम्मे है। ग्रामीणों के सहयोग से बड़कियारी गांव स्थित पुराने दुर्गा मंदिर के ठीक बगल में वर्ष 2022 में भव्य नए मंदिर का निर्माण कराया गया है।
यहां वैष्णव मत से पूजा होने के कारण पशु बलि की बजाय, मन्नत पूरी होने पर स्वर्ण-चांदी निर्मित आभूषण, वस्त्र, फल, मिठाई आदि मां के चरणों में अर्पित करने की पुरानी परंपरा रही है। पूजा के अवसर पर दशमी तिथि को मेले का आयोजन भी किया जाता है। बड़कियारी गांव में होने वाले दुर्गा पूजा की दो विशेष बातें यह है कि यहां सभी सम्प्रदाय के लोग मिल जुलकर आपसी भाईचारे के माहौल में दुर्गोत्सव मनाते हैं। साथ ही एकादशी के दिन प्रतिमा विसर्जन की तथा जुलूस की सारी जिम्मेवारी सभी समुदाय की महिलाएं ही मिल जुलकर निभाती हैं। प्रतिमा विसर्जन यानि मां की विदाई पुरुषों की बजाय सिर्फ महिलाओं द्वारा किए जाने की परंपरा दूर-दराज के क्षेत्रों में आकर्षण का केंद्र बिंदु बना हुआ है। वर्ष 2026 में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का कार्य पश्चिम बंगाल के बहादुरपुर गांव निवासी पुरोहित वीरु भट्टाचार्य कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल राज्य की सीमा से सटे होने के कारण यहां की पूजा पद्धति में बंगला संस्कृति की छाप स्पष्ट झलकती है। एकादशी तिथि को प्रतिमा विसर्जन के दिन भक्तजनों व स्थानीय लोगों के बीच प्रसाद स्वरुप खिचड़ी खिलाने की चली आ रही पुरानी परंपरा की व्यवस्था इस वर्ष भी पूजा समिति की ओर से की गई है।
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