सिटी रिपोर्टर| हाजीपुर
वैशाली महिला महाविद्यालय में चल रहे हिंदी सप्ताह का समापन संगोष्ठी के साथ संपन्न हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), हिंदी विभाग और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (उत्तर बिहार प्रांत) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय “भारत की संपर्क भाषा के रूप में हिंदी: चुनौतियां एवं संभावनाएं” था। कॉलेज के प्राचार्य की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. प्रमेन्द्र कुमार वाजपेयी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, अतिथियों के सम्मान और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई।
मुख्य वक्ता जेपी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमेन्द्र कुमार वाजपेयी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी की शुरुआत छठी शताब्दी से हुई है। उन्होंने हिंदी की ऐतिहासिक विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि इसमें संतों, नाथों की परंपरा और शंकराचार्य से लेकर सभी निर्गुण-सगुण भक्त कवियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। प्रो. वाजपेयी ने जोर देकर कहा कि भाषा के साथ हमारी संस्कृति भी गहराई से जुड़ी हुई है, और हमारे देश में भजन की जो समृद्ध परंपरा रही है, उसने भी हिंदी को मजबूत और व्यापक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
बहुभाषी राष्ट्र को आपस में जोड़ती है संपर्क भाषा, हिंदी में है यह स्वाभाविक क्षमता संगोष्ठी में जमुनी लाल कॉलेज के गणित विभाग के डॉ. सुनील कुमार ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के गौरवशाली इतिहास से सभी को परिचित कराया और हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। इसके बाद हिंदी विभाग की अध्यक्षा डॉ. अनिशा ने संपर्क भाषा की महत्ता को समझाते हुए कहा कि यह वह माध्यम है जो किसी बहुभाषी राष्ट्र में अलग-अलग भाषा बोलने वाले नागरिकों को आपस में जोड़ती है। भारत जैसे विशाल और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में हिंदी को एक स्वाभाविक संपर्क भाषा के रूप में देखा गया है। वहीं, प्राचार्य ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदी को और अधिक सरल व सहज होना चाहिए ताकि वह संपर्क भाषा के रूप में हर जगह आसानी से स्वीकार्य हो सके।
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