पाकिस्तान को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने की तैयारी! बनेंगे 12 से 15 प्रांत? जानें मुनीर का गेम प्लान – Bharat24live

Shreeom Singh
Date: 30-09-26 12:29
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने और देश की प्रशासनिक व्यवस्था बदलने को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. इसकी शुरुआत 30 जुलाई को हुई, जब गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि देश की मौजूदा व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही है. उन्होंने नए प्रांत बनाने या प्रशासनिक इकाइयों की संख्या बढ़ाने की बात कही थी. उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में हलचल तेज हो गई.
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में प्रांतों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो इससे देश में सेना की भूमिका और प्रभाव बढ़ सकता है. हालांकि, नए प्रांत बनाने का फैसला आसान नहीं है और इसके लिए संविधान में तय प्रक्रिया का पालन करना होगा.
संवैधानिक और राजनीतिक रुकावटें
पाकिस्तान में प्रांतों की सीमाओं या संख्या में बदलाव के लिए संसद के साथ संबंधित प्रांतीय विधानसभा की मंजूरी भी जरूरी है. PPP ने भी कहा है कि नए प्रांत बनाने या सीमाओं में बदलाव का फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है.
सिंध को बांटने के मुद्दे पर पहले से ही विरोध देखने को मिला है. ऐसे में किसी भी बदलाव के लिए राजनीतिक सहमति बनाना बड़ी चुनौती होगी. वहीं, PTI का रुख भी इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है.
सेना को क्या फायदा होगा?
सवाल यह है कि अगर पाकिस्तान में कई नए प्रशासनिक यूनिट बनाए जाते हैं तो इसका सेना पर क्या असर पड़ेगा. विश्लेषकों के मुताबिक, नई प्रशासनिक सीमाओं के साथ सेना की कमान और तैनाती के ढांचे में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है.
मौजूदा समय में पाकिस्तान की सेना की कोर कमांड देश की मौजूदा प्रांतीय सीमाओं के हिसाब से काम करती हैं. अगर चारों प्रांतों को ज्यादा प्रशासनिक इकाइयों में बांटा जाता है, तो नई कमांड और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की जरूरत बढ़ सकती है. इससे सेना के संगठन के विस्तार की संभावना बन सकती है.
सेना की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा
नए प्रांतों और प्रशासनिक इकाइयों का समर्थन करने वाले इसे बेहतर शासन और आम लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने का तरीका बताते हैं. वहीं, आलोचकों और कुछ विश्लेषकों की चिंता है कि इस तरह के बदलाव से सेना का प्रभाव और मजबूत हो सकता है.
पाकिस्तान में सेना की आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में भूमिका को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है. 18वें संविधान संशोधन के बाद प्रांतों को ज्यादा अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता मिली थी. अब प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की बहस के बीच इसी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
फिलहाल नए प्रांत बनाने का मुद्दा राजनीतिक बहस के स्तर पर है. पाकिस्तान सरकार ने भी संकेत दिया है कि इस पर संसद में चर्चा हो सकती है. इसलिए आगे की दिशा राजनीतिक सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी.
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News