CEC पर महाभियोग के बजाय जमीनी आंदोलन पर विपक्ष का जोर, चुनाव आयोग की IT प्रमुख के खिलाफ FIR की तैयारी – india alliance pivots to street mobilization over cec gyanesh kumar impeachment targets ec it chief with fir – Jagran

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की बजाय अब जमीनी राजनीतिक लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
विपक्ष महाभियोग की बजाय राजनीतिक लड़ाई पर ध्यान केंद्रित करेगा
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजय मिश्र, नई दिल्ली। एसआईआर-वोट चोरी विवाद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए ‘महाभियोग प्रस्ताव’ को तवज्जो न देकर विपक्षी दल उनके खिलाफ जनता के बीच जाकर राजनीतिक लड़ाई को तवज्जो देंगे।
महाभियोग प्रस्ताव पर संसद में बहुमत के आंकड़े पक्ष में न होने को देखते हुए विपक्ष अपनी रणनीति में बदलाव यह बदलाव करेगा। हालांकि एसआईआर में कथित धांधली को लेकर चुनाव आयोग तथा सीईसी को कानूनी परिधि के दायरे में घेरने के लिए विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की आईटी डिविजन की महानिदेशक सीमा खन्ना को घेरने का कदम उठाएंगी।
सूत्रों के अनुसार विपक्षी दलों की बैठक में सीमा खन्ना के खिलाफ एसआइआर में कथित धांधली को केंद्रीयकृत रूप से अंजाम देने को लेकर देश भर में एफआइआर दर्ज कराए जाने की रणनीति पर सहमति बनी है।
विपक्ष की बैठक में शामिल एक सूत्र के अनुसार आइएनडीआइए में बेहतर राजनीतिक समन्वय और संवाद के लिए उपसमिति बनाने का सुझाव राजद नेता तेजस्वी यादव ने दिया और कहा कि शीर्ष नेताओं की बैठक लंबे अंतराल पर होती है।
ऐसे में अहम मुद्दों पर विपक्ष का संयुक्त दृष्टिकोण और त्वरित समन्वय के लिए कुछ नेताओं का एक उप समूह तथा प्रवक्ता होना चाहिए। सूत्र ने दावा किया कि अधिकांश नेताओं ने इससे सहमति व्यक्त की और जल्द उपसमूह के गठन की बात कही गई।
सूत्रों के अनुसार बैठक में ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग के संदर्भ में वरिष्ठ कानूनविद कपिल सिब्बल ने कहा कि 2023 में बनाए कानून के तहत सीईसी को कानूनी कार्रवाई व गिरफ्तारी से बचने का कवच है।
ऐसे में कानूनी दायरे में लेने का विकल्प खुला रखने के लिए चुनाव आयोग की एसआइआर प्रक्रिया में केंद्रीयकृत गड़बड़ी को लेकर घिरी सीमा खन्ना के खिलाफ देश में एफआइआर किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के संबंध में सिब्बल ने संसद में बहुमत का आंकड़ा पक्ष में न होने तथा स्पीकर और सभापति के सत्तापक्ष के साथ होने की बात कहते हुए इसकी अड़चनें गिनाई।
साथ ही इसकी बजाय राजनीतिक लड़ाई को ज्यादा तवज्जो देने की जरूरत बताई जिस पर व्यापक सहमति दिखी। इसका आशय साफ है कि विपक्ष अब महाभियोग प्रस्ताव पर ज्यादा सियासी दांव लगाने का प्रयास करने से बचेगा।
सूत्रों ने बताया कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने वोट चोरी पर अपना आकलन रखते हुए ममता बनर्जी से दक्षिण कोलकाता में बंगाल के हालिया चुनाव के बाद बड़ी संख्या में सरकारी भवन में इवीएम के जल जाने का मामला उठाते हुए इसे बहुत बड़ा घोटाला बताया।
वहीं टीमएसी प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के आइटी से लेकर तमाम अन्य वेंडर को दिए ठेके की गहन जांच की बात उठाई और विपक्षी गठबंधन में एक कार्यकर्ता के रूप में काम करने की बात कही।
सूत्र ने बताया कि आनलाइन बैठक में शामिल उद्धव ठाकरे ने कहा सीजेपी को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को समर्थन देने के अपने दल के फैसले से रूबरू कराते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर तीखा निशाना साधा।
ठाकरे का कहना था कि एसआइआर मामले की सुनवाई तत्काल सुनवाई से इंकार करते हुए यह कहना कि यह तो उपचुनाव का मामला है, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
ज्ञानेश कुमार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि केवल चुनाव चोरी नहीं चुनाव आयोग पार्टियों की लूट भी कर रहा है और एक चोरी खोलो तो दूसरी चोरी सामने आ जाती है। सीपीएम-एमएल के दीपांकर भटाचार्य ने फार्म-6 में खेल का दावा करते हुए इसे बेहद गंभीर बताया।
माकपा महासचिव एमए बेबी ने कहा कि यह लड़ाई केवल चुनाव आयोग नहीं बल्कि आरएसएस से है और इसलिए नागरिकों तथा सिविल सोसाइटी को शामिल करना होगा।

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