Yuvraj Singh
Date: 03-10-26 19:57
Kal Ka Mausam 4 October: मौसम विभाग ने 4 अक्टूबर के लिए देशभर के मौसम का ताजा अपडेट जारी किया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है. केरल और माहे के अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है.
केरल-तमिलनाडु में भारी बारिश की चेतावनी
IMD ने 4 अक्टूबर को केरल एवं माहे तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. लगातार या तेज बारिश के दौरान स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
तमिलनाडु में 50 KM प्रति घंटे तक चलेंगी हवाएं
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में रविवार को गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. इस दौरान बिजली चमकने का खतरा भी बना रहेगा. मौसम खराब होने पर लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी गई है.
आंध्र प्रदेश और केरल में भी आंधी-बारिश
आंध्र प्रदेश के साथ केरल और माहे के कुछ हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है. यहां गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज सतही हवाओं का असर भी देखने को मिल सकता है.
पूर्वोत्तर राज्यों में बिजली चमकने का अलर्ट
पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी मौसम विभाग ने गरज-चमक और बिजली चमकने की चेतावनी जारी की है. असम और मेघालय के अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में आकाशीय बिजली का खतरा बना रह सकता है. खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना जरूरी है.
कोंकण-गोवा में उमस से बढ़ेगी परेशानी
दक्षिण भारत में बारिश के अलर्ट के बीच कोंकण और गोवा के कुछ इलाकों में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है. दिन के समय अधिक नमी के कारण लोगों को गर्मी और उमस से परेशानी महसूस हो सकती है. वहीं, IMD के ताजा बुलेटिन में मछुआरों के लिए किसी विशेष चेतावनी का उल्लेख नहीं किया गया है.
2001 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून
इस साल जून से सितंबर के बीच देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिलीमीटर बारिश होती है. यानी मानसून सीजन में बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम रही. IMD के मुताबिक, 2001 के बाद यह मानसून सीजन चौथा सबसे कम बारिश वाला रहा. विभाग ने बारिश की कमी के प्रमुख कारणों में प्रशांत क्षेत्र में बनी अल नीनो स्थिति को भी बताया है, जिसके मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना जताई गई है.
14 कम दबाव की प्रणालियों ने संभाली बारिश की स्थिति
IMD के महानिदेशक मौसम विज्ञान डॉ. मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, अगर कम दबाव की प्रणालियों के कारण अतिरिक्त बारिश नहीं हुई होती तो देश में बारिश की कमी और अधिक हो सकती थी. इस मानसून सीजन में 14 कम दबाव की प्रणालियां बनीं और ये कुल 77 दिनों तक सक्रिय रहीं, जबकि सामान्य अवधि करीब 57 दिन रहती है. मानसून की वापसी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट चुका है.
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