Political Popcorn: ठाकरे बंधुओं की एकजुटता से AAP में बगावत तक, देश की सियासत में मचा घमासान! – bharat24live.com

Bharat24
Date: 05-10-26 10:06
Political Popcorn: सियासत में इस वक्त कहीं भाईचारा दिख रहा है तो कहीं बगावत की आहट. मुंबई में ठाकरे बंधु साथ आए, गोरखपुर में थप्पड़ गूंजा, कांग्रेस 10 अक्टूबर के पेंच में फंसी है और पंजाब AAP में 26 विधायकों की चर्चा ने हलचल बढ़ा दी है.
1. जब ‘विराट गर्जना’ ने मिलाए दो बिछड़े सुर!
मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ ठाकरे बंधुओं का साझा हल्लाबोल!
मुंबई की सड़कों पर आज चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एक साथ ताल ठोकते नजर आए. राजनीतिक प्रेक्षक इस अप्रत्याशित भाईचारे को सिर्फ चुनावी गणित नहीं, बल्कि मराठी मानुष के वोट बैंक को साधने की अंतिम जुगत मान रहे हैं. अलबत्ता सत्ता पक्ष इसे हताशा में उठाया गया कदम बताकर चुटकी ले रहा है कि हार के डर से अब पुराने गिले-शिकवे भुलाए जा रहे हैं. सचमुच जब सियासी जमीन खिसकने लगे तो खून के रिश्ते मंच पर खुद-ब-खुद जीवंत हो उठते हैं. अब यक्ष प्रश्न यह खड़ा है कि क्या यह साझा मार्च सिर्फ चुनाव आयोग को घेरने तक सीमित रहेगा या आने वाले चुनावों में सीटों के बंटवारे पर भी गले मिलने का यह सिलसिला जारी रहेगा?
2. कुर्सी की जंग में तमाचों की गूंज!
मंच पर बैठने को लेकर पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़!
समाजवादी पार्टी के चल रहे ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ के दौरान गोरखपुर प्रेस क्लब में उस वक्त असहज स्थिति बन गई जब मंच पर बैठने की होड़ में पूर्व जिलाध्यक्ष पर हाथ छोड़ दिया गया. राजनीतिक प्रेक्षक चुटकी ले रहे हैं कि बाहर लोकतंत्र बचाने निकले नेताजी लोग पार्टी के भीतर अनुशासन का आसन नहीं बचा पा रहे हैं. अलबत्ता पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार इसे परिवार का ‘आंतरिक उत्साह’ बताकर मामले पर पर्दा डालने में लगे हैं. सचमुच, जब कार्यकर्ताओं की महत्वाकांक्षा अनुशासन की सीमा लांघने लगे तो कैमरे के सामने नजारा कुछ ऐसा ही हास्यास्पद बन जाता है. अब यक्ष प्रश्न यही है कि जो दल प्रेस वार्ता की अग्रिम पंक्ति में बैठने का सलीका तय नहीं कर पा रहा, वह चुनावी दंगल में विपक्षी चक्रव्यूह को कैसे भेद पाएगा?
3. इधर कुआं उधर खाई, राहुल बाबू की फ्लाइट कहां जाई?
10 अक्टूबर की तारीख और कांग्रेस का भारी धर्मसंकट!
आगामी 10 अक्टूबर की तारीख को लेकर कांग्रेस के थिंक-टैंक के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है तो ठीक उसी दिन चेन्नई में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पहले से मुकर्रर है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे राजधानी की सियासी धड़कन और दक्षिण के विस्तार के बीच फंसा गंभीर पेंच मान रहे हैं. अलबत्ता सत्ता पक्ष इस पशोपेश पर चुटकी लेते हुए कह रहा है कि विपक्ष टाइम-टेबल बनाने में ही उलझा रहता है. सचमुच अगर युवराज दक्षिण उड़ते हैं तो दिल्ली की मुख्य धारा में कहीं नैरेटिव छूटने का अंदेशा है और अगर रुकते हैं तो दक्षिण का संदेश खटाई में पड़ता दिखेगा. अब यक्ष प्रश्न यह खड़ा है कि पर्दे के पीछे सीजेपी से संपर्क साधने वाले रणनीतिकार बीच का कौन-सा ऐसा करिश्माई रास्ता निकालेंगे जिससे दिल्ली का तवा भी गर्म रहे और चेन्नई की रोटियां भी न जलें?
4. लखनऊ में ब्राह्मण सम्मेलन से सजेगी नई पिच!
यूपी कांग्रेस की नई कमान आराधना मिश्रा के हाथ..12-14 अक्टूबर को शपथ..सियासी जलसे में तब्दील करने की पूरी पटकथा!
उत्तर प्रदेश कांग्रेस में आराधना मिश्रा ‘मोना’ की ताजपोशी को एक भव्य सियासी जलसे में तब्दील करने की पूरी पटकथा तैयार कर ली गई है. 12 से 14 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित इस शपथ ग्रहण के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा से हरी झंडी और तारीख का इंतजार किया जा रहा है. राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि पूर्व सांसदों, विधायकों और निवर्तमान अध्यक्ष अजय राय को साथ बिठाकर पार्टी एकजुटता का मुखौटा मजबूत करने की जुगत में है. अलबत्ता सत्ता पक्ष यानी भाजपा की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी पदभार संभालते ही जिस ‘विशाल ब्राह्मण सम्मेलन’ का खाका खींच रही है, वह जमीन पर कितना टिकता है. सचमुच यूपी की बीहड़ सियासत में जातीय सम्मेलनों के जरिए खोई जमीन तलाशना कोई आसान डगर नहीं है. अब यक्ष प्रश्न यही है कि क्या आराधना मिश्रा की यह नई सामाजिक इंजीनियरिंग लखनऊ के दफ्तर से निकलकर सूबे के ब्राह्मण मतदाताओं के दिलों में जगह बना पाएगी?
5. झाड़ू के तिनके बिखरे, मान सरकार की चौखट पर बगावत की दस्तक!
पंजाब ‘आप’ में महाविस्फोट के आसार..26 विधायकों के पाला बदलने की चर्चा!
पंजाब की सियासत में आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष का लावारिस धुआं अब खुली लपटों में बदलता दिख रहा है. मौर से विधायक सुखवीर सिंह मयेरखाना द्वारा स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी पर आवाज उठाने के बाद हुए निष्कासन ने आग में घी डालने का काम किया है. राजनीतिक प्रेक्षक इस दावे को हल्के में नहीं ले रहे हैं कि करीब 26 असंतुष्ट विधायक बगावत की फिराक में हैं और नवीन जयहिंद के जरिए कांग्रेस और भाजपा दोनों खिड़कियों से संपर्क साधा जा रहा है. अलबत्ता भगवंत मान सरकार इसे विपक्ष की कोरी अफवाह और अनुशासनहीन तत्वों की छटपटाहट बताकर खारिज कर रही है. सचमुच दिल्ली मॉडल का ढोल बजाने वाली सत्ता के अपने ही विधायक जब जमीनी बदहाली का पर्दाफाश करें, तो स्थिति असहज हो ही जाती है. अब यक्ष प्रश्न यह है कि क्या मान सरकार इस आंतरिक असंतोष के तूफान को समय रहते काबू कर पाएगी या पंजाब का सियासी मौसम कोई नया उलटफेर दिखाने जा रहा है?
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