क्या रूस में बढ़ रहा प्लेग… हजमत सूट पहने हुए दिखे एक्सपर्ट, ये क्या होता है? – Aaj Tak

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रूस से इन दिनों ऐसी तस्वीरें आ रही हैं,जिनमें लोग हजमत सूट पहने नजर आ रहे हैं. वहां  एक लैब में प्लेग पर हो रहे एक्सपेरिमेंट के दौरान एक टेक्निशियन की मौत हो गई. इसके बाद वहां कोई अनजान वायरस से प्लेग फैलने की बात कही जा रही है. उस लैब टेक्निशियन के संपर्क में आए लोगों को क्वारंटीन करके रखा गया है. 
ऐसे में वहां हजमत सूट पहने एक्सपर्ट्स की कई तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो इस घटना से जुड़े मामलों की जांच कर रहे हैं.  इसे पहने लोग धीमी, बेढंगी, सुस्त चाल से चलते हैं. अपने एस्पिरेटर के साथ वे अंतरिक्ष यात्रियों जैसे लगते हैं. इस धरती के होते हुए भी इससे अलग.
हजमत सूट एक ऐसा पहनावा है, जो लोगों में भय और सुकून दोनों तरह की भावनाओं को जन्म देता है. एक वह व्यक्ति है जो इसे पहनता है और दूसरा वह व्यक्ति जिससे उसे सुरक्षा की जरूरत है.हजमत सूट पॉप संस्कृति का एक जाना-पहचाना प्रतीक भी है. हममें से कुछ लोगों को कोरोनावायरस महामारी के दौरान पहली बार किसी व्यक्ति को हज़मत सूट पहने हुए देखने का मौका मिला होगा.
 कोरोनावायरस महामारी के दौरान अखबारों और समाचार बुलेटिनों में चिकित्सा कर्मियों की हज़मत सूट पहने तस्वीरें आम हो गई थीं. एक बार फिर से वैसी तस्वीरें सामने आने लगी हैं. ऐसे में जानते हैं कि हज़मत सूट क्या है? यह कैसे काम करता है और इसकी उत्पत्ति कहां से हुई?
क्या होता है हजमत सूट
हजमत सूट पूरे शरीर को ढकने वाला एक पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट यानी पीपीई है. यह पहनने वाले को खतरनाक चीजों, जैसे – वायरस, जहरीले केमिकल,  रेडियोएक्टिव  तत्व, बायोलॉजिकल एजेंट और संक्रामक पैथोजन से पूरी तरह सुरक्षित रखता है. आम बोलचाल में इसे पूरे शरीर को ढकने वाली प्लास्टिक की बाहरी लेयर के रूप में समझा जाता है. हज़मत सूट का कोई एक समान स्टैंडर्ड नहीं है. अलग- अलग रिस्क लेवल के लिए अलग- अलग स्तर की सुरक्षा वाले हजमत सूट होते हैं. 
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक,  हजमत सूट के दो मॉडल सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं. एक टाइवेक 800 जे है. इसमें हुड वाला कवरऑल, ओवरटेप्ड सीम और सेल्फ-एडहेसिव ज़िपर होता है. दूसरा है टाइवेक 600 प्लस. इसमें मोजे और बूट फ्लैप लगे होते हैं. हज़मैट सूट में बिल्ट-इन रेस्पिरेटर और फुल मास्क भी हो सकते हैं.हर सूट हाथ से बनाया जाता है. इन्हें मशीनों से फुलाकर डैमेज की जांच की जाती है और इस्तेमाल से पहले मैन्युअल रूप से इसका सुपरविजन किया जाता है. क्योंकि, कोई भी सूट कहीं से भी फटा नहीं होना चाहिए.
कैसे हुई इस प्रोटेक्टिव सूट की उत्पत्ति
आधुनिक हजमत सूट की उत्पत्ति 1910 में मंचूरिया में फैली महामारी से हुई थी. वहां डॉक्टर वू लियन-तेह का मानना ​​था कि यह महामारी हवा के माध्यम से  फ्लू की तरह फैलती है. उन्होंने सभी डॉक्टर, नर्स और अंतिम संस्कार में तैनात स्टाफ को उनके द्वारा डिज़ाइन किए गए एक साधारण जालीदार मास्क पहनने का निर्देश दिया.  यह पहली बार था जब किसी महामारी के दौरान  इस्तेमाल के लिए कोई मास्क बनाया गया था. इस तरह एक मास्क बनाने से धीरे- धीरे पूरे शरीर को कवर करने वाले किट विकसित होने लगे. 
20वीं शताब्दी के दौरान, केमिकल और न्यूक्लियर प्रयोगों ने आधुनिक हजमत सूट विकसित किए.  1990 के दशक में इबोला के प्रकोप के दौरान चिकित्सा क्षेत्र में इनका व्यापक इस्तेमाल होने लगा. फिर यह मेडिकल और साइंस सेक्टर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण  प्रतीक बन गया. 
सबसे पहले रूसी वैज्ञानिकों ने 1870 के दशक में वोल्गा नदी में फैले प्लेग के प्रकोप से निपटने के लिए एक प्रोटोटाइप हजमत सूट डिजाइन किया था. ये सूट कभी बनाए नहीं गए, लेकिन इनका डिजाइन बहुत ही सुंदर था. 
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