Shreeom Singh
Date: 08-10-26 10:29
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. सऊदी अरब के एयरपोर्ट और दूसरे इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं. इसी बीच पाकिस्तान ने पहली बार साफ तौर पर माना है कि उसके सैनिक पहले से सऊदी अरब में तैनात हैं और अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे हैं.
इससे पहले खबर सामने आई थी कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुआ मक्का रक्षा समझौता सक्रिय हो गया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सऊदी अरब की मदद के लिए पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका का स्वागत किया है. वहीं, सीरिया भी सऊदी अरब को सैन्य मदद देने के विकल्प पर विचार कर रहा है.
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने CNN को बताया कि पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना कई दशकों से सऊदी सेना के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि मक्का रक्षा समझौता अचानक नहीं हुआ है. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच लंबे समय से राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य संबंध हैं. पाकिस्तान के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में हुए समझौते के तहत करीब 8,000 पाकिस्तानी सैनिक, एयरफोर्स की एक लड़ाकू स्क्वाड्रन और एयर डिफेंस सिस्टम सऊदी अरब भेजे गए थे.
सऊदी में हूतियों के हमले तेज
पाकिस्तान का यह बयान ऐसे समय आया है जब हूतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ गया है. सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, दो अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 3 लोगों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए.
इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं. हूतियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि किंग खालिद एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया.
वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि मिसाइल को रास्ते में रोक दिया गया और उसके लॉन्च प्लेटफॉर्म को भी नष्ट कर दिया गया. इससे पहले हूतियों ने एयरलाइंस को सऊदी एयरस्पेस से दूर रहने की चेतावनी भी दी थी.
मक्का रक्षा समझौता क्यों अहम है?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने अगस्त में मक्का रक्षा समझौता किया था. इसके तहत एक देश पर हमला बाकी दोनों देशों पर हमले के तौर पर माना जाएगा.
5 अक्टूबर को रियाद में इस समझौते से जुड़ी रणनीतिक, राजनीतिक और रक्षा समिति की बैठक हुई. इसमें सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों पर चर्चा हुई. तीनों देशों ने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी हमले को खारिज किया.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर इस समझौते के तहत सेना को तेजी से सऊदी अरब भेजा जा सकता है.
ट्रंप ने क्यों किया स्वागत?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की मदद के लिए पाकिस्तान और तुर्की की संभावित सैन्य भूमिका का स्वागत किया है. व्हाइट हाउस में जब उनसे मक्का रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब को सैन्य मदद देने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश सऊदी अरब की मदद करना चाहते हैं तो यह अच्छी बात है.
वहीं, तुर्की सरकार इस रक्षा समझौते को अपनी संसद के सामने रखने की तैयारी कर रही है. इसके बाद सऊदी अरब में तुर्की सैनिकों की संभावित तैनाती का रास्ता साफ हो सकता है.
सऊदी अरब ने सीरिया से मांगी मदद?
सऊदी अरब की मदद के लिए अब सीरिया भी विकल्पों पर विचार कर रहा है. अमेरिकी और सीरियाई अधिकारियों के मुताबिक, सीरिया सऊदी अरब को रक्षात्मक मदद देने से लेकर हूतियों के खिलाफ सैनिक भेजने तक के विकल्पों पर चर्चा कर रहा है.
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, सऊदी अरब ने सीरिया से सैन्य बल भेजने का अनुरोध किया है. हालांकि, सीरिया ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है.
एक सीरियाई राजनयिक ने कहा कि हूती हमलों के बीच उनका देश सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा है. हालांकि, फिलहाल सीरिया की प्राथमिकता अपने घरेलू हालात और गृहयुद्ध के बाद देश को दोबारा संभालना है.
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