वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सिंगापुर पहुंची हैं। इस दौरान वे शीर्ष नेतृत्व, वैश्विक निवेशकों और …और पढ़ें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तीन दिवसीय सिंगापुर यात्रा पर पहुंचीं
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर शुक्रवार को सिंगापुर पहुंचीं। 11 अक्टूबर तक की इस यात्रा के दौरान वह देश के शीर्ष नेतृत्व, वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगी।
इन बैठकों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करना है। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) के मामले में सिंगापुर सबसे बड़ा स्रोत है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच वहां से कुल करीब 194.68 अरब डालर का निवेश आया।
निवेशकों के साथ बातचीत में सीतारमण ‘हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड’ प्रबंधकों के साथ एक गोलमेज बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके अलावा वह निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ सरकार-कारोबार (जी2बी) की कई बैठकें करेंगी।
इन बैठकों का उद्देश्य भारत की वृद्धि की संभावनाओं, निवेश के अवसरों और वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय परिदृश्य में हो रहे बदलावों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।
अपनी यात्रा के दौरान, वित्त मंत्री सिंगापुर के राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ बिजनेस अधिकारियों और वैश्विक संस्थागत निवेशकों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें करेंगी।
सीतारमण सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन षणमुगरत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, उप प्रधानमंत्री गन किम योंग और विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से मुलाकात करेंगी।
यात्रा के दौरान सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में व्यापार और निवेश, डिजिटल वित्तीय कनेक्टिविटी, पूंजी बाजार, कराधान, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, कौशल विकास और विमानन शामिल हैं।
निवेशक समुदाय के साथ अपनी बैठकों के तहत, वित्त मंत्री हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड मैनेजरों के साथ एक गोलमेज बैठक में हिस्सा लेंगी।
वह निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और बिजनेस लीडरों के साथ सरकार-से-व्यवसाय (G2B) बैठकों की एक श्रृंखला भी करेंगी, जिसमें भारत की विकास संभावनाओं, निवेश के मौकों और वैश्विक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य में हो रहे बदलावों पर चर्चा की जाएगी।
सीतारमण प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थानों, निवेश फर्मों और हेल्थकेयर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आमने-सामने की बैठकें भी करेंगी। इनमें गवर्नमेंट ऑफ़ सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (GIC), टेमासेक होल्डिंग्स, DBS बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट और IHH हेल्थकेयर के प्रतिनिधि शामिल हैं।
सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है, जहां अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच कुल निवेश लगभग 194.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है।
GIC और टेमासेक सहित सिंगापुर के संस्थागत निवेशकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) और GIFT सिटी उन प्लेटफॉर्म में शामिल हैं जो इन्वेस्टमेंट व्हीकल और फंड के जरिए भारत में सिंगापुर के निवेशकों की ज्यादा भागीदारी को आसान बना सकते हैं।
वित्त मंत्रालय, संबंधित मंत्रालयों और इंडस्ट्री बॉडीज के साथ मिलकर, सिंगापुर के इच्छुक निवेशकों और भारतीय कंपनियों, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और राज्य सरकारों के बीच संपर्क बनाने में मदद करेगा। इस पहल का मकसद पहचान किए गए निवेश के मौकों को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
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