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कभी-कभी बिजनेस का बड़ा आइडिया किसी बड़ी मशीन, महंगे ऑफिस या भारी निवेश से नहीं, बल्कि खाने की एक छोटी-सी पसंद से शुरू होता है. तीन दोस्तों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. बेंगलुरु में रहने के दौरान उन्हें दिल्ली के असली स्वाद वाले छोले-भटूरे की कमी महसूस हुई. उन्होंने सोचा कि क्यों न दिल्ली के इस मशहूर खाने को बेंगलुरु के लोगों तक पहुंचाया जाए. इसी सोच से श्याम जी छोले भटूरे की शुरुआत हुई. दोस्तों ने शुरुआत में छोले-भटूरे की एक प्लेट सिर्फ 9 रुपये में बेची. धीरे-धीरे लोगों को उनका स्वाद पसंद आने लगा और दुकान पर ग्राहकों की भीड़ जुटने लगी.
दिल्ली के स्वाद की कमी ने दिया बिजनेस का आइडिया
इस कहानी के पीछे तीन दोस्त हैं- करण, चेतन और नवज्योति. ये तीनों बेंगलुरु में दिल्ली जैसे असली छोले-भटूरे का स्वाद मिस कर रहे थे. उन्हें लगा कि अगर उन्हें अपने पसंद का खाना ढूंढने में परेशानी हो रही है, तो शहर में रहने वाले दूसरे लोगों को भी ऐसी दिक्कत हो सकती है. दोस्तों ने इस परेशानी को बिजनेस के मौके के रूप में देखा. उन्होंने सिर्फ एक दुकान खोलने के बजाय ऐसा ब्रांड बनाने के बारे में सोचा, जहां लोगों को दिल्ली के मशहूर स्ट्रीट फूड का स्वाद मिल सके.
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दिल्ली जाकर कई दुकानों पर चखा छोले-भटूरे का स्वाद
दोस्तों ने बिजनेस शुरू करने से पहले खाने के स्वाद पर खास ध्यान दिया. वे दिल्ली गए और कई हफ्तों तक अलग-अलग इलाकों में छोले-भटूरे की दुकानों पर जाकर स्वाद चखा. उन्होंने पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक जैसे इलाकों में भी जाकर वहां के खाने को समझने की कोशिश की. उनका मकसद सिर्फ छोले-भटूरे बेचना नहीं था, बल्कि लोगों को दिल्ली जैसा स्वाद देना था. इसके लिए उन्होंने अलग-अलग दुकानों के खाने को समझा और पारंपरिक तरीके से छोले-भटूरे बनाने वाले अनुभवी रसोइयों की तलाश की. यह काम आसान नहीं था. बेंगलुरु दिल्ली से काफी दूर है और रसोइयों को अपने घर से इतनी दूर जाकर काम करने के लिए तैयार करना भी चुनौती थी. हालांकि, दोस्तों ने धीरे-धीरे उनका भरोसा जीता और उन्हें अपने साथ काम करने के लिए मनाया.
छोले-भटूरे से आगे बढ़ाया मेन्यू
शुरुआत में दोस्तों का मुख्य फोकस छोले-भटूरे पर था. लेकिन जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ी, उन्होंने मेन्यू में दूसरी चीजें भी शामिल कीं. इसमें चाट, मिठाइयां, लस्सी और उत्तर भारतीय खाने की अन्य चीजें शामिल हैं. इससे ग्राहकों को एक ही जगह पर कई तरह के पसंदीदा व्यंजन मिलने लगे. ब्रांड ने अपने शुरुआती आइडिया को बनाए रखते हुए खाने के विकल्प भी बढ़ाए. यह ब्रांड अब हर महीने 50 हजार से ज्यादा भटूरे बेचता है. यह आंकड़ा बताता है कि छोले-भटूरे जैसे एक आम व्यंजन को सही तरीके से पेश करके भी बड़ा ग्राहक आधार बनाया जा सकता है.
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सिर्फ 9 रुपये में बेचे छोले-भटूरे
बिजनेस शुरू करते समय दोस्तों ने कीमत पर खास ध्यान दिया. उन्होंने छोले-भटूरे की एक प्लेट सिर्फ 9 रुपये में बेचनी शुरू की. कम कीमत होने की वजह से लोगों के लिए इसे खरीदकर चखना आसान था. उनकी योजना में दो तरह के ग्राहक खास थे. पहला, उत्तर भारत से बेंगलुरु पहुंचे वे लोग जो घर जैसा स्वाद चाहते थे. दूसरा, दक्षिण भारत के वे लोग जिन्होंने दिल्ली के असली छोले-भटूरे पहले कभी नहीं खाए थे. कम कीमत और अलग स्वाद के मेल ने लोगों का ध्यान खींचा. धीरे-धीरे दुकान पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी. इस तरह एक साधारण खाने को लेकर शुरू हुआ आइडिया बिजनेस में बदलने लगा.
100 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंचा ब्रांड?
इस कहानी में सबसे खास बात यह है कि दोस्तों ने किसी बिल्कुल नए या अनोखे व्यंजन से शुरुआत नहीं की. छोले-भटूरे पहले से ही लोकप्रिय थे. उन्होंने दिल्ली के स्वाद को बेंगलुरु तक पहुंचाने, सही रसोइयों को साथ जोड़ने और शुरुआती कीमत कम रखने पर ध्यान दिया.
नोट: Aajtak.in इस खबर की पुष्टि नहीं करता है. यह खबर वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर लिखी गई है.
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