इंडिया गठबंधन आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने वाला है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके इस मार्च की जानकारी दी है. इंडिया गठबंधन के इस मार्च को लेकर बीजेपी ने निशाना साधा है. वहीं सीजेआई ने भी राहुला गांधी से मिलने से मना कर दिया है. इस पर गौरव भाटिया ने पोस्ट शेयर किया है.
बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा, सत्ता के बंटवारे से लेकर सत्ता पाने की बेताबी तक, राहुल गांधी ने संवैधानिक कानून और राजनीतिक ड्रामेबाजी के बीच का फ़र्क ही भुला दिया है! CJI का राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार करना एक अहम संदेश देता है: न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए.
संविधान राजनीतिक दिखावे के लिए कोई प्रॉप नहीं
उन्होंने आगे, संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक ड्रामेबाज़ी में नहीं घसीटा जा सकता. श्री राहुल गांधी, सिर्फ संविधान की कॉपी साथ रखने का मतलब यह नहीं है कि आप उसे समझते हैं. उसे पढ़ें. उसका सम्मान करें और सत्ता के बंटवारे के सिद्धांत को समझें. संविधान शासन चलाने के लिए एक मार्गदर्शक है, न कि राजनीतिक दिखावे के लिए कोई प्रॉप!
From separation of powers to desperation for power, Rahul Gandhi has confused constitutional law with political theatre! The CJI declining to meet Rahul Gandhi and Opposition leaders sends an important message: The judiciary must remain above day-to-day political battles. Constitutional institutions cannot be dragged into political theatrics. Mr. Rahul Gandhi, merely carrying a copy of the Constitution does not mean you understand it. Read it. Respect it. And learn the doctrine of separation of powers. The Constitution is a guide to governance, not a prop for political performance!
सीजेआई का फैसला मैसेज देता है
गौरव भाटिया ने लिखा, चीफ जस्टिस का राहुल गांधी और विपक्ष के नेताओं से मिलने से इनकार करने का फ़ैसला एक अहम संदेश देता है: न्यायपालिका को रोज़मर्रा की राजनीतिक नौटंकी से दूर रखना जरूरी है. संवैधानिक संस्थाएं विपक्ष की राजनीतिक हताशा का अखाड़ा नहीं बन सकतीं. राहुल गांधी जी, सिर्फ संविधान साथ लेकर घूमने से उसका ज्ञान नहीं हो जाता. कभी समय निकालकर संविधान जरूर पढ़ें! ख़ासकर शक्तियों के बंटवारे का सिद्धांत. संविधान दिखावे की चीज़ नहीं है; यह लोकतंत्र की गरिमा है!
मुख्य न्यायाधीश द्वारा राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार की खबर एक महत्वपूर्ण संदेश देती है, न्यायपालिका को रोज़मर्रा की राजनीतिक नौटंकी से दूर रखना आवश्यक है। संवैधानिक संस्थाएं विपक्ष की राजनीतिक हताशा का अखाड़ा नहीं बन सकतीं। राहुल गांधी जी, संविधान को हाथ में लेकर घूमने से संविधान का ज्ञान नहीं हो जाता। कभी संविधान पढ़ भी लीजिए! विशेषकर शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) का सिद्धांत। संविधान दिखावे की वस्तु नहीं, लोकतंत्र की मर्यादा है!
सीजेआई ने मिलने की मांग पर क्या कहा
राहुल गांधी से मिलने से इनकार करने पर सीजेआई ने रिप्लाई किया है. उन्होंने कहा, लेटर मुझे मिला था तो मैंने उसका रात में उसका जवाब दे दिया है. मैंने कुछ रीजंस उसमें दिए हैं जिसके बेसिस पर मैंने अपनी असमर्थता व्यक्त की है कि मैं मिल नहीं पाऊंगा. सुप्रीम कोर्ट के द्वार सबके लिए खुले हैं. कोई भी पिटीशन किसी भी कोई भी चाहे वो आम नागरिक है या कोई माननीय सदस्य है, किसी इलेक्टेड बॉडी का, कोई भी है. भारत का हर नागरिक का उसका अधिकार है वो हमारे पास आए, हम कानून की व्यवस्था को और कानून के अह अनुरूप अह जो उनकी समस्या है उसका हम अपनी तरफ से उसकी सुनवाई करेंगे और जो जिसको बनता है उसको ज़रूर अह उसका अधिकार वो देंगे.
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दीक्षा छाबड़ा ABP live.Com में सीनियर कॉपी एडिटर हैं. यहां ये न्यूज डेस्क का हिस्सा हैं. दीक्षा को देश, विदेश और एंटरटेनमेंट की दुनिया में काफी दिलचस्पी है. वो इन सभी के बारे में लिखती हैं. इन्हें पत्रकारिता के जगत में 9 साल पूरे हो चुके हैं. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ की थी. इसके बाद से ये इंडिया टीवी, टीवी9 जैसी संस्थाओं में एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर चुकी हैं. दीक्षा ने अपनी पढ़ाई इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट से की है.
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