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Maharashtra News: महाराष्ट्र के बीड जिले के पुलिस अधीक्षक ने जातिगत पूर्वाग्रह को खत्म करने के प्रयास के तहत पुलिसकर्मियों को एक-दूसरे को जातिसूचक नाम के बजाय उनके पहले नाम से संबोधित करने का निर्देश दिया है. बीड के जिला पुलिस अधीक्षक नवनीत कंवत ने एक न्यूज़ एजेंसी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि यह कदम तटस्थता की भावना देगा. कंवत को पिछले महीने मसाजोग के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के बाद बीड के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया गया था.
हमने एक-दूसरे को जातिसूचक शब्दों से संबोधित करना बंद कर दिया: SP
देशमुख को नौ दिसंबर को अगवा कर लिया गया था और प्रताड़ित किया गया था और कथित तौर पर मार दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘अगर हम बीड में माहौल बदलना चाहते हैं तो हमें अपने घरों से इसकी शुरुआत करनी होगी. लोग अधिकारियों की जाति उनके उपनाम से पहचानते हैं. इसलिए हमने एक-दूसरे को जातिसूचक शब्दों से संबोधित करना बंद कर दिया है.’
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वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सभी कर्मियों को एक-दूसरे को उनके प्रथम नाम से संबोधित करना होगा और उन्होंने इसे चलन में भी ला दिया है तथा अधिकारी भी उन्हें इसी नाम से ही संबोधित करते हैं.
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सोशल मीडिया पर तारीफ कर रहे लोग
बीड़ के पुलिस अधीक्षक की इस मुहिम को सोशल मीडिया पर लोगों का खूब समर्थन मिल रहा है. कई यूजर्स का कहना है कि ये पहल पूरे महाराष्ट्र में लागू होनी चाहिए. इससे प्रदेश के हर समाज में जातिगत भेदभाव खत्म होगा और हर जाति के लोगों में एक दूसरे के प्रति आपसी स्नेह और सम्मान में इजाफा होगा. (इनपुट:भाषा)
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