शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के 'भारत बांग्लादेश नहीं है' वाले बयान पर पलटवार किया है।
रिजिजू ने ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान पर थरूर का पलटवार
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime change) की चर्चा को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भारत और बांग्लादेश की तुलना करने वाले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
इससे पहले, रिजिजू ने विपक्षी कांग्रेस और JNU की छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा पर पलटवार किया था। नेहा बोरा ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की आलोचना करते हुए ‘सत्ता परिवर्तन’ का जिक्र किया था और आरोप लगाया था कि इसका मकसद मतदाताओं को सूची से हटाना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए, जिसमें विपक्ष से जुड़े कई नेताओं ने अलग-अलग मौकों पर ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात की थी, रिजिजू ने लिखा, ‘इन लोगों को देखिए, जो सत्ता परिवर्तन लाना चाहते हैं। ध्यान से सुन लें: भारत, बांग्लादेश नहीं है।’
रिजिजू ने आगे लिखा, ‘भारत के युवा बेवकूफ नहीं हैं; वे भारत का निर्माण करेंगे, उसे बर्बाद नहीं करेंगे। सच्चे भारतीय युवा पदक जीत रहे हैं, कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, और सांस्कृतिक प्रतीक बन रहे हैं।
इस क्लिप में नेहा बोरा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल समेत कई लोगों के बयानों के कुछ हिस्से शामिल थे, जिन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात कही थी।
इस विवाद में कूदते हुए, थरूर ने सोमवार को कांग्रेस के करीबी लोगों की इन टिप्पणियों को कम करके आंकने की कोशिश की।उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि भारत की तुलना बांग्लादेश या फ्रांस से की जा सकती है।
मुझे ये तुलनाएं बहुत प्रासंगिक नहीं लगतीं। फ्रांस में जो हिंसा हुई है – जैसे बसों और पुलिस थानों को आग लगाना – हम ऐसी किसी भी हिंसा का समर्थन कभी नहीं करेंगे।’
उन्होंने फ्रांस में बढ़ती महंगाई और अन्य मुद्दों को लेकर हुए दंगों का भी जिक्र किया। थरूर ने कहा कि विपक्ष केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में विश्वास रखता है और उसी का समर्थन करता है।
थारूर ने कहा, ‘जहां तक बड़े मुद्दों की बात है, तो सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का कोई मतलब नहीं है। हम तो बस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं।
आज चिंता की बात यह है कि एक बेहद त्रुटिपूर्ण, अनियमित और आंशिक रूप से अवैध प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
इसीलिए हम मांग कर रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को रद किया जाए। यह एक संवैधानिक मुद्दा है। इसका मकसद किसी सरकार को गिराना या ऐसा ही कुछ करना नहीं है।’
बांग्लादेश में, प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने से पहले, शेख हसीना ने आरोप लगाया था कि उनके देश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को काटकर एक ‘ईसाई राष्ट्र’ बनाने की ‘गोरे लोगों’ की साजिश रची जा रही है।
विरोध-प्रदर्शनों और भारी तबाही के बीच उनके देश छोड़ने के बाद, उनके बेटे साजीब वाजेद ने आरोप लगाया कि अमेरिका की पिछली सरकार ने उनके देश में ‘सत्ता परिवर्तन’ के लिए ‘लाखों डॉलर’ खर्च किए थे।
बीजेपी के कई नेताओं ने ‘सत्ता परिवर्तन’ के नैरेटिव को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। कांग्रेस, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और वामपंथी दल दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, क्योंकि SIR प्रक्रिया के तहत कथित तौर पर 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
CJP को विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है। इसका नेतृत्व विदेश में पढ़े-लिखे एक पब्लिक रिलेशंस ग्रेजुएट और कुछ अन्य लोग कर रहे हैं, जिन्होंने खुलकर कांग्रेस और राहुल गांधी समेत उसके नेताओं का समर्थन किया है।
इससे पहले, उन्होंने NEET परीक्षा का पेपर लीक होने के मुद्दे पर भी विरोध-प्रदर्शन किया था, जिसके चलते अंततः धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। भारत निर्वाचन आयोग ने SIR से जुड़े सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
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