Yuvraj Singh
Date: 20-10-26 22:31
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारत की बढ़ती ताकत को अब अमेरिका ने भी खुले तौर पर स्वीकार किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताते हुए कहा कि देश के पास भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की शानदार क्षमता है. रुबियो का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं और तेल के नए स्रोत तलाशने पर जोर दिया जा रहा है.
भारत के पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता
मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि भारत पहले भी भारी कच्चे तेल की रिफाइनिंग कर चुका है और आने वाले समय में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बढ़ने पर यह क्षमता और महत्वपूर्ण हो सकती है. उन्होंने संकेत दिया कि भारत वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है. भारत की आधुनिक रिफाइनरियां अलग-अलग गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में देश की स्थिति मजबूत होती है.
वेनेजुएला के तेल पर रिलायंस से चर्चा करेगा अमेरिका
रुबियो ने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने और इससे जुड़े अवसरों पर बातचीत करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कंपनियों के पास वेनेजुएला में पहले से तेल उत्पादन से जुड़े अधिकार मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जा सकता है. इस संभावित सहयोग से भारत की रिफाइनिंग क्षमता और वेनेजुएला के तेल संसाधनों के बीच साझेदारी को बढ़ावा मिल सकता है.
वैश्विक ऊर्जा संकट का पूरा समाधान नहीं है वेनेजुएला का तेल
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बढ़ने मात्र से दुनिया में ऊर्जा संकट के कारण पैदा होने वाली सभी कमियों को दूर नहीं किया जा सकता. हालांकि, उनके मुताबिक इससे निकट भविष्य में कुछ राहत मिल सकती है और लंबे समय में वैश्विक तेल आपूर्ति को मजबूती मिल सकती है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबंधों और अन्य नियामकीय बाधाओं से जुड़े मुद्दों को सुलझाना जरूरी होगा.
तेल आयात के स्रोत बढ़ाने की भारत की रणनीति की तारीफ
रुबियो ने कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत की ओर से अलग-अलग देशों पर निर्भरता बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत ने अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और ऐसा करना समझदारी भरा कदम है. अमेरिका भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में एक संभावित साझेदार बनना चाहता है. ऐसे में दोनों देशों के बीच तेल, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दे इस दौरे के प्रमुख विषयों में शामिल हैं.
भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है यह बातचीत?
मार्को रुबियो का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा जारी है. वेनेजुएला के तेल को लेकर रिलायंस के साथ संभावित बातचीत भारत की रिफाइनिंग क्षमता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका को भी रेखांकित करती है. हालांकि, इस सहयोग की दिशा और दायरा प्रतिबंधों तथा आगे होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा. यदि दोनों पक्ष सहमति बना लेते हैं, तो इससे भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी को नई गति मिल सकती है.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका! GDP ग्रोथ घटकर 3.65% पर आई, जानिए भारत से कितना पीछे
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें