Rashmi Singh
Date: 20-10-26 14:05
Pakistan Air Pollution: पाकिस्तान में सर्दियों के आने से पहले ही वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें हैं. इसका असर पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. गैस की उपलब्धता कम होने के बीच बिजली उत्पादन के लिए कोयले और तेल जैसे दूसरे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ने की आशंका है. इससे हवा में प्रदूषण बढ़ सकता है और पहले से खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों में स्मॉग की समस्या गंभीर हो सकती है.
लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और मुरी जैसे इलाकों में वायु प्रदूषण पहले से चिंता का विषय रहा है. ऐसे में अगर बिजली उत्पादन के लिए ज्यादा मात्रा में प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों का सहारा लिया जाता है, तो पंजाब समेत देश के कई हिस्सों में सर्दियों के दौरान हालात बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है.
LNG की कमी से पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर दबाव
पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस की कमी का असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है. घरों और उद्योगों को गैस की आपूर्ति बनाए रखना भी चुनौती बन रहा है. कराची यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. शाइस्ता तबस्सुम के मुताबिक, युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार में रुकावटें आई हैं और कतर से होने वाली गैस की सप्लाई भी काफी प्रभावित हुई है.
गैस की उपलब्धता घटने और ऊर्जा की कीमतें बढ़ने के बीच पाकिस्तान को बिजली की मांग पूरी करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है. अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, LNG की कमी के कारण देश में बिजली उत्पादन के लिए फर्नेस ऑयल का इस्तेमाल बढ़ाया गया था. यदि गैस की आपूर्ति में बाधा बनी रहती है, तो वैकल्पिक ईंधनों पर निर्भरता और बढ़ सकती है.
कोयले और तेल के इस्तेमाल से बढ़ सकता है वायु प्रदूषण
बिजली उत्पादन में कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ने से हवा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इन ईंधनों को जलाने से धुआं और सूक्ष्म प्रदूषक कण निकलते हैं, जो हवा में मौजूद प्रदूषण को बढ़ा सकते हैं. इन कणों के संपर्क में आने से सांस संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा बढ़ सकता है.
लाहौर और पंजाब के दूसरे शहर पहले से ही प्रदूषण की समस्या का सामना करते रहे हैं. ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में कोयले और तेल का इस्तेमाल होने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है. हालांकि, प्रदूषण कितना बढ़ेगा, यह ईंधनों के वास्तविक इस्तेमाल, मौसम और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी निर्भर करेगा.
पाकिस्तान में स्मॉग के पीछे सिर्फ ऊर्जा संकट नहीं
पाकिस्तान में स्मॉग की समस्या के लिए केवल LNG की कमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. खासकर लाहौर और पंजाब के अन्य शहरी इलाकों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं और सड़कों की धूल भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं.
इसके अलावा, फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष जलाने से भी हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ सकती है. सर्दियों के दौरान मौसम की कुछ परिस्थितियां प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक सकती हैं, जिससे स्मॉग लंबे समय तक बना रहता है. ऐसे में ऊर्जा संकट के कारण कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ना प्रदूषण की पहले से मौजूद समस्या को और गंभीर बना सकता है.
इलेक्ट्रिक गाड़ियों से कितनी कम हो सकती है परेशानी?
पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2030 तक 50 फीसदी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों के कारण सड़कों पर होने वाला प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है. लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार्जिंग नेटवर्क, पर्याप्त बिजली और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करना भी अहम होगा.
इसके साथ ही बिजली उत्पादन के तरीकों पर भी ध्यान देना जरूरी है. यदि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा कोयले और तेल से बनाया जाता है, तो प्रदूषण का कुछ हिस्सा सड़कों से हटकर बिजली उत्पादन केंद्रों की ओर स्थानांतरित हो सकता है. इसलिए इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को बढ़ावा देना भी जरूरी है.
ऊर्जा संकट के साथ स्मॉग से निपटना भी चुनौती
पाकिस्तान के सामने एक ओर गैस की आपूर्ति बनाए रखने और बिजली की मांग पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना भी जरूरी है. यदि LNG की कमी के कारण बिजली उत्पादन में कोयले और तेल का इस्तेमाल बढ़ता है, तो पहले से प्रदूषित शहरों में स्मॉग का खतरा बढ़ सकता है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, बिजली उत्पादन को अधिक स्वच्छ बनाने और वाहनों तथा उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण जैसे कदम अहम होंगे. ऊर्जा की जरूरतें पूरी करने के साथ हवा की गुणवत्ता में सुधार करना पाकिस्तान के लिए आने वाले महीनों में बड़ी प्राथमिकता बन सकता है.
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