Rashmi Singh
Date: 21-10-26 08:53
Dussehra 2026: दशहरे पर हर साल रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है. रामायण में रावण का अंत उसके अहंकार और अधर्म के पतन के तौर पर देखा जाता है. लेकिन रावण की मृत्यु से जुड़ा एक ऐसा प्रसंग भी है, जो भगवान श्रीराम की उदारता और मानवीय मूल्यों को दर्शाता है. क्या आप जानते हैं कि रावण के वध के बाद उसका अंतिम संस्कार किसने किया था? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण के छोटे भाई विभीषण ने उसका अंतिम संस्कार किया था, लेकिन इसके लिए उन्हें भगवान राम ने समझाया और आदेश दिया था.
भगवान राम ने विभीषण को क्यों दिया अंतिम संस्कार का आदेश?
रामायण के अनुसार, युद्धभूमि में रावण का वध होने के बाद विभीषण अपने बड़े भाई की मृत्यु से दुखी थे. हालांकि, रावण ने माता सीता का हरण किया था और भगवान राम के विरुद्ध युद्ध किया था, फिर भी वह विभीषण का बड़ा भाई था. ऐसे में विभीषण उसके अंतिम संस्कार को लेकर संकोच कर रहे थे. तब भगवान श्रीराम ने उन्हें शोक छोड़कर अपने भाई की अंत्येष्टि करने के लिए कहा. रामचरितमानस में इस प्रसंग का वर्णन मिलता है, जहां श्रीराम की आज्ञा के बाद विभीषण ने देश, काल और विधि का ध्यान रखते हुए रावण का अंतिम संस्कार किया. यह प्रसंग बताता है कि शत्रु के प्रति भी मृत्यु के बाद मानवीय गरिमा और संस्कारों का सम्मान किया जाना चाहिए.
रावण के अंतिम संस्कार के बाद विभीषण का हुआ राजतिलक
रावण की अंत्येष्टि पूरी होने के बाद भगवान राम ने लंका के शासन की जिम्मेदारी विभीषण को सौंपने की व्यवस्था की. उन्होंने लक्ष्मण को सुग्रीव, अंगद, नल, नील, जामवंत और हनुमान जैसे प्रमुख सहयोगियों के साथ विभीषण के राजतिलक के लिए भेजा. रामायण के प्रसंग के अनुसार, भगवान राम ने स्वयं लंका में प्रवेश नहीं किया, क्योंकि वे अपने पिता के वचन का पालन कर रहे थे. इसी कारण उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को विभीषण के राज्याभिषेक की जिम्मेदारी दी. इस तरह रावण के अंत के बाद लंका में नए शासन की शुरुआत हुई और विभीषण को राजा बनाया गया.
विभीषण ने बताया था रावण की मृत्यु का रहस्य
रावण एक शक्तिशाली योद्धा था और उसे अस्त्र-शस्त्र चलाने में महारत हासिल थी. राम और रावण के बीच हुए भीषण युद्ध में जब भगवान राम के बाणों का उस पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ रहा था, तब विभीषण ने रावण की मृत्यु से जुड़ा रहस्य बताया. प्रचलित रामायण कथा के अनुसार, रावण की नाभि में अमृत कुंड था, जिसके कारण उसका वध करना कठिन हो रहा था. विभीषण से यह जानकारी मिलने के बाद भगवान राम ने रावण की नाभि पर बाण चलाकर अमृत कुंड को नष्ट किया और अंततः उसका वध कर दिया. इस प्रसंग में विभीषण की भूमिका को रावण के अंत की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है.
रावण के अंत से मिलती है क्या सीख?
रावण का जीवन और उसका अंत कई महत्वपूर्ण संदेश देते हैं. वह विद्वान, शक्तिशाली और पराक्रमी था, लेकिन अहंकार और गलत फैसलों ने उसे विनाश की ओर पहुंचा दिया. दूसरी ओर, भगवान राम ने युद्ध में रावण का वध करने के बाद भी उसके अंतिम संस्कार का सम्मान बनाए रखने की बात कही. यह प्रसंग धर्म, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों के महत्व को रेखांकित करता है. दशहरे पर रावण दहन केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि ज्ञान और शक्ति के बावजूद अहंकार का रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जा सकता है.
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