अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 20 अक्टूबर 2026 को भारत आए. इस बार रुबियो दिल्ली की जगह सीधे मुंबई पहुंचे. फिर जामनगर के रिलायंस रिफाइनरी भी गए. यानी पूरा दौरा ‘धंधे’ और ‘ऊर्जा’ के इर्द-गिर्द घूमता रहा. दूसरी ओर रूबियो ने भारत में पाकिस्तान के कसीदे पढ़ दिए. रूस से तेल खरीदारी पर बात की और अमेरिका से ट्रेड डील पर भी बड़े बयान दिए. तो रूबियो के भारत दौरे से कौन सी 5 बड़ी बातें सामने आईं और इसके फायदे-नुकसान क्या हैं, जानते हैं…
रूबियो का यह दौरा भारत के लिए ‘मिक्स्ड पैकेज’ है. ट्रेड डील 99% तैयार होना और ‘रणनीतिक साझेदारी’ का तमगा बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पाकिस्तान के मुद्दे पर अमेरिका का नरम रुख, रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ की तलवार और 26/11 पर पाकिस्तान का नाम न लेना भारत के लिए चिंता की बातें हैं.
1. ट्रेड डील ‘99% तैयार’, लेकिन 1% अटकी
मार्को रूबियो ने साफ कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का 99% काम पूरा हो चुका है. अब सिर्फ ‘कुछ शब्दों और मुद्दों’ पर बात बाकी है, जिसे ‘कुछ हफ्तों’ में फाइनल किया जा सकता है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक के बाद दोनों पक्षों ने जल्दी डील खत्म करने की बात दोहराई . रूबियो ने यह भी कहा कि डील का ऐलान तभी होगा जब ‘हर डिटेल’ पूरी तरह तय हो जाए, क्योंकि बीच में डील टूटने से बड़े रिश्ते को नुकसान हो सकता है.
फायदा: अगर डील साइन होती है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी. टैरिफ को लेकर पिछले कुछ समय से बना तनाव खत्म हो सकता है. यह भारत के लिए इस मायने में भी अहम है कि अमेरिका उसे एक ‘भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार’ मान रहा है, जबकि चीन के साथ अमेरिका का ट्रेड वॉर चल रहा है. यानी भारत को चीन की जगह लेने का मौका मिल सकता है.
नुकसान: बाकी बचा 1% ही सबसे बड़ा सिरदर्द है. रूबियो ने खुद कहा कि डील ‘कुछ शब्दों’ पर अटकी है, यानी तकनीकी और कानूनी डिटेल पर. अगर यह 1% नहीं सुलझा, तो 99% काम भी बेकार जाएगा. साथ ही, अमेरिका डील के बदले भारत से ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में बड़ी खरीद की उम्मीद कर रहा है, जो भारत के लिए महंगी पड़ सकती है.
2. पाकिस्तान के ‘कसीदे’ और ‘नसीहत’
यही दौरे का सबसे विवादास्पद हिस्सा था. रूबियो ने भारतीय मीडिया से कहा, ‘किसी भी देश के साथ अमेरिका का रिश्ता भारत के खर्च पर नहीं आएगा.’ साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के साथ रिश्ते को ‘जरूरी’ बताया. रूबियो का तर्क था कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि अमेरिका को उससे बातचीत करनी ही पड़ेगी.
रूबियो ने यह भी कहा कि पाकिस्तान से बातचीत से अमेरिका उन ‘गतिविधियों’ को रोकने में मदद कर सकता है जिनकी भारत को चिंता है. दिलचस्प बात यह है कि रूबियो ने भारत और ईरान के रिश्ते का उदाहरण देकर अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की. यानी जैसे भारत ईरान से बात करता है, वैसे ही अमेरिका पाकिस्तान से करता है.
फायदा: रूबियो का बयान दिल्ली के लिए भरोसे का बयान है. साथ ही, अमेरिका का यह कहना कि वह पाकिस्तान से बातचीत के जरिए भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकता है, एक कूटनीतिक संकेत है कि वाशिंगटन भारत को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहा.
नुकसान: भारत की धरती पर खड़े होकर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और भौगोलिक अहमियत का हवाला देना भारत के लिए ‘नरम’ संदेश है. भारत हमेशा चाहता है कि अमेरिका पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर सख्त रुख अपनाए, लेकिन रूबियो ने उलटा पाकिस्तान के साथ ‘जुड़े रहने’ को जरूरी बताया. यह लंबे समय में भारत की सुरक्षा चिंताओं को कमजोर कर सकता है.
3. रूस पर निर्भरता घटाने की ‘नसीहत’
रूबियो का एक बड़ा एजेंडा भारत की रूस पर सैन्य और ऊर्जा निर्भरता कम करना था. उन्होंने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया और कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत वेनेजुएला से भी तेल खरीदे और रिलायंस के साथ मिलकर उस पर काम करे.
रूबियो ने कहा कि भारत ने तेल खरीद में ‘काफी विविधता’ लाई है, जो ‘समझदारी’ है. रूस से तेल खरीदने पर लगे टैरिफ को लेकर उनका कहना था कि ये टैरिफ ‘भारत को सजा देने के लिए नहीं’ हैं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से हैं. ट्रंप ने इन्हें टालकर भारत के साथ रिश्ते को बचाया है.
फायदा: अगर भारत अमेरिकी और वेनेजुएली तेल की तरफ बढ़ता है, तो रूस पर निर्भरता कम होगी और अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ता भी मजबूत होगा. रूबियो का यह कहना कि टैरिफ ‘सजा’ नहीं हैं, भारत के लिए राहत की बात है. इससे भारत को भरोसा मिलता है कि वह रूस से तेल खरीदने पर तुरंत दंडित नहीं होगा.
नुकसान: रूस से तेल खरीदना भारत के लिए सस्ता सौदा है. अगर भारत अमेरिकी या वेनेजुएली तेल की तरफ जाता है, तो उसे महंगा पड़ सकता है. साथ ही, रूस के साथ पुराने रक्षा और कूटनीतिक रिश्ते भी दबाव में आ सकते हैं. रूबियो ने साफ कहा कि टैरिफ ‘भविष्य में लग सकते हैं.’ भारत को हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा.
4. 26/11 को श्रद्धांजलि, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं
मुंबई पहुंचकर रूबियो ने ताज महल पैलेस होटल पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां 2008 के मुंबई हमलों में 166 लोगों की जान गई थी. अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में कहा गया कि रूबियो ने आतंकवादी नेटवर्क खत्म करने और दोषियों को सजा दिलाने की बात कही. रूबियो ने बयान में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया.
फायदा: रूबियो का 26/11 मेमोरियल पर जाना और आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराना भारत के लिए भावनात्मक और कूटनीतिक रूप से अहम है. इससे भारत को संदेश मिलता है कि अमेरिका आतंकवाद के मुद्दे पर उसके साथ खड़ा है, कम से कम कागजी तौर पर.
नुकसान: पाकिस्तान का नाम न लेना साफ बताता है कि अमेरिका अपने कूटनीतिक फायदे के लिए भारत के सबसे संवेदनशील मुद्दे पर भी समझौता कर रहा है. यह भारत के लिए चिंता की बात है, क्योंकि 26/11 भारत के लिए सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं, बल्कि पाकिस्तान की भूमिका का सबूत है.
5. ‘रणनीतिक गठबंधन’ का तमगा, टैरिफ की तलवार लटकी
रूबियो ने भारत-अमेरिका रिश्ते को ‘रणनीतिक साझेदारी’ बताया और कहा कि यह अमेरिका की ‘मुट्ठी भर सबसे अहम रणनीतिक साझेदारियों’ में से एक है. जयशंकर के साथ बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और टेक्नोलॉजी पर बात हुई. साथ ही रूबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत से अमेरिकी हथियार और ऊर्जा खरीदने की उम्मीद करता है.
फायदा: ‘रणनीतिक साझेदारी’ का तमगा भारत की अंतरराष्ट्रीय साख के लिए बड़ी बात है. रक्षा और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ने से भारत को अमेरिकी तकनीक और हथियार मिल सकते हैं, जो चीन और पाकिस्तान के मुकाबले उसकी स्थिति को मजबूत करेगा.
नुकसान: अमेरिकी हथियार और ऊर्जा खरीदना महंगा सौदा है. रूबियो ने यह भी कहा कि टैरिफ और वीजा नियम ‘भारत के खिलाफ नहीं’ हैं. भारत को यह देखना होगा कि क्या सिर्फ बातों का दम है या जमीन पर सच में बदलाव आएगा. अगर अमेरिका भारत से ज्यादा खरीदने का दबाव बनाता है, तो यह भारत के व्यापारिक हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
विदेश मामलों के जानकार और JNU के प्रोफेसर डॉ. राजन कुमार से बातचीत के आधार पर…
ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.
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