Rashmi Singh
Date: 25-10-26 06:58
Sharad Purnima 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना और चंद्रमा की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करने और दीप जलाने से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. साल 2026 में शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा. इस अवसर पर कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाते हैं और रात में पूजा-अर्चना करते हैं. अगर आप भी इस दिन माता की पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए शुभ मुहूर्त से लेकर पूजा सामग्री, विधि और मंत्र तक की पूरी जानकारी.
शरद पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त
शरद पूर्णिमा पर पूजा करने से पहले पूर्णिमा तिथि और चंद्रोदय का समय जानना जरूरी है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे होने की जानकारी दी गई है. वहीं, कोजागर या निशीथ काल की पूजा के लिए 25 अक्टूबर की रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर की रात 12:31 बजे तक का समय बताया गया है. इस दिन हर्षण योग और रेवती नक्षत्र का संयोग भी बताया गया है. पूजा का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि जरूर कर लें.
मां लक्ष्मी की पूजा के लिए किन चीजों की होगी जरूरत?
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए पहले से पूजन सामग्री तैयार रखना सुविधाजनक रहता है. इसके लिए एक साफ चौकी, लाल या पीला कपड़ा और मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा रख लें. पूजा में रोली, मौली, अक्षत, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची और शुद्ध देसी घी का दीपक इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा ताजे फूल, शंख, घंटी और तांबे या पीतल का लोटा भी रख सकते हैं. भोग के लिए खीर, मखाने, बताशे या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई तैयार करें. पूजा शुरू करने से पहले सभी सामग्री एक जगह रख लेने से विधि-विधान से आराधना करना आसान हो जाता है.
शरद पूर्णिमा पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा?
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और श्रद्धापूर्वक व्रत तथा पूजा का संकल्प लें. शाम को घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा रखें. इसके बाद दीपक जलाएं और रोली, अक्षत व फूल अर्पित करके विधि-विधान से पूजा करें. मां लक्ष्मी को खीर, मखाने और मिठाई का भोग लगाया जा सकता है. शरद पूर्णिमा की रात खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा भी प्रचलित है. श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भजन, मंत्र जाप और रात्रि जागरण कर सकते हैं.
शरद पूर्णिमा पर किन मंत्रों का करें जाप?
इस पावन अवसर पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु ‘ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप कर सकते हैं. चंद्रमा की आराधना करने वाले भक्त चंद्र मंत्रों का जाप भी करते हैं. मंत्र जाप के दौरान शांत मन से मां लक्ष्मी का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें. धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा की रात को पूजा, ध्यान और भक्ति के लिए विशेष महत्व दिया गया है. हालांकि, मंत्र जाप को जीवन की सभी परेशानियां दूर करने या धन प्राप्ति की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए; इसे श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का हिस्सा माना जाता है.
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा और चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है. कोजागरी पूर्णिमा से जुड़ी परंपराओं में रात में जागकर माता की आराधना करना भी शामिल है. कई परिवार इस दिन खीर बनाते हैं और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. श्रद्धालु इस पर्व को घर में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि की कामना के साथ मनाते हैं. पूजा करते समय साफ-सफाई, श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है.
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