Rashmi Singh
Date: 26-10-26 07:50
Brazil President Election: ब्राजील की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कड़े मुकाबले में कंजर्वेटिव उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को मात देकर सत्ता पर अपनी पकड़ बरकरार रखी है. चुनाव में लूला को 51.75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि फ्लावियो के खाते में 48.25 प्रतिशत मत आए. ब्राजील के निर्वाचन प्राधिकरण ने नतीजों की पुष्टि की. इस जीत के साथ लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वामपंथी नेतृत्व जारी रहने का रास्ता साफ हो गया.
पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने कैसे बदला चुनाव का रुख?
चुनावी मुकाबले की शुरुआत लूला के लिए आसान नहीं रही थी. 4 अक्टूबर को हुए पहले दौर में वह फ्लावियो से करीब 22 लाख वोट पीछे रह गए थे. इसके बाद उन्होंने अपने प्रचार अभियान की रणनीति बदली और युवाओं के साथ-साथ उन मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्होंने अब तक अपना फैसला नहीं किया था. लूला ने लगातार चुनावी रैलियां कीं और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने की कोशिश की.
उनके अभियान में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के कार्यकाल से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए. कोरोना महामारी के दौरान सरकार के रवैये, कल्याणकारी योजनाओं में कटौती और अमेजन के जंगलों को हुए नुकसान को लेकर मतदाताओं के बीच चर्चा की गई. लूला के समर्थकों ने ‘नेवर अगेन बोल्सोनारो’ यानी ‘बोल्सोनारो दोबारा कभी नहीं’ का नारा देकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की.
युवाओं और अनिर्णीत मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति
लूला ने चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया को भी अहम हथियार बनाया. युवाओं से जुड़ने के लिए उन्होंने स्मार्टफोन खरीदा और समर्थकों के साथ सेल्फी व वीडियो बनाए. इन तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब साझा किया गया. इसके अलावा उनके समर्थकों ने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया और मतदान के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की. इस रणनीति ने चुनाव के दूसरे दौर में उनके अभियान को नई गति दी.
महंगाई, अपराध और सरकारी योजनाओं पर आमने-सामने रहे दोनों उम्मीदवार
ब्राजील के इस चुनाव में महंगाई, अपराध और आम लोगों की आर्थिक स्थिति बड़े मुद्दे बनकर उभरे. फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपराध पर सख्त कार्रवाई करने और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने का वादा किया. दूसरी ओर, लूला ने आर्थिक प्रोत्साहनों और गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर जोर देकर मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश की.
दोनों उम्मीदवारों के खेमों को भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का भी सामना करना पड़ा. पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो का नाम कई विवादों में आया, जबकि लूला को पहले भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराया गया था और वह एक साल से अधिक समय तक जेल में रहे थे. बाद में उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी गई. लूला के समर्थकों ने गरीबी कम करने और वंचित समुदायों के लिए किए गए उनके काम को उनकी जीत का आधार बताया. वहीं, फ्लावियो के समर्थकों ने महंगाई और अधिक करों को लेकर नाराजगी जताई.
ट्रंप प्रशासन की नीतियां भी चुनावी बहस का हिस्सा बनीं
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों पर भी चर्चा हुई. लूला ने ब्राजील के निर्यात पर लगाए गए अमेरिकी शुल्क और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की. उन्होंने इन मुद्दों पर ब्राजील के हितों को प्राथमिकता देने की बात कही.
इसके विपरीत, फ्लावियो ने ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर संबंध बनाने और व्यापारिक समझौतों को आगे बढ़ाने का वादा किया. उन्होंने दुर्लभ मृदा खनिजों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया. ब्राजील के अनुमान के मुताबिक, देश में इन खनिजों का भंडार करीब 2.1 करोड़ टन हो सकता है. ट्रंप ने चुनाव से पहले कहा था कि वह ब्राजील के चुनाव पर नजर रख रहे हैं, हालांकि उन्होंने किसी उम्मीदवार का खुलकर समर्थन नहीं किया.
मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर क्यों उठा विवाद?
मतदान के दिन समय बढ़ाने के फैसले ने भी राजनीतिक बहस को जन्म दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्रिस्टियानो ज़ानिन ने मतदान की अवधि दो घंटे बढ़ाकर स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे तक कर दी. लूला के खेमे ने नौ राज्यों में मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने वाली बसों से जुड़ी समस्याओं का हवाला दिया था. वहीं, बोल्सोनारो के समर्थकों ने दक्षिणी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में अतिरिक्त समय देने की मांग की थी.
हालांकि, पूरे देश में मतदान का समय बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठे. कुछ मतदान केंद्र पहले ही बंद हो चुके थे. रियो डी जेनेरियो के एक मतदान केंद्र पर मशीनें बंद होने के बाद दोबारा शुरू नहीं हो सकीं. बोल्सोनारो समर्थक सांसद निकोलस फरेरा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टिप्पणी करते हुए चुनावी मुकाबले को लेकर अपना रुख जाहिर किया. इन घटनाओं के बीच मतदान प्रक्रिया और उसके प्रबंधन पर चर्चा तेज हो गई.
लूला की जीत पर समर्थकों ने मनाया जश्न
नतीजों में लूला की बढ़त स्पष्ट होने के बाद रियो डी जेनेरियो और साओ पाउलो समेत कई शहरों में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए. लोगों ने सार्वजनिक स्थानों और बार में जुटकर मतगणना देखी और जीत का जश्न मनाया. लूला के समर्थकों ने इसे गरीबों और वंचित समुदायों की जीत बताया. दूसरी ओर, फ्लावियो के समर्थकों ने देश में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया.
लूला का राजनीतिक सफर कई दशकों पुराना है. उन्होंने पहली बार 1989 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था और 2002 में पहली बार जीत हासिल की. इसके बाद 2006 में भी वह राष्ट्रपति चुने गए और 2003 से 2010 तक देश का नेतृत्व किया. वर्ष 2022 में जायर बोल्सोनारो को हराकर उन्होंने सत्ता में वापसी की थी. अब फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ मिली इस जीत ने ब्राजील की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ को एक बार फिर रेखांकित किया है.
ये भी पढ़ें- महंगाई, भ्रष्टाचार और महंगे मकान… फ्रांस से इटली तक, यूरोप के 5 देशों में जनता का हल्लाबोल
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें