अखाड़ा परिषद का फैसला- अमृत स्नान करेंगे: रवींद्र पुरी बोले- बड़ा जुलूस नहीं निकालेंगे, संगम तट को खाली कराया – Dainik Bhaskar

महाकुंभ का आज, बुधवार को 17वां दिन है। मौनी अमावस्या पर दूसरा अमृत स्नान आज जारी है। संगम नोज का एक रास्ता खाली करा लिया गया है। RAF और पुलिस के जवान तैनात हैं। 11 बजे तीन शंकराचार्य, नागा साधु और अखाड़ों के महामंडलेश्वर अमृत स्नान करने जाएंगे।
भोर में अखाड़ों के साधु-संत अमृत स्नान के लिए निकले थे। इस बीच, भगदड़ के बाद संगम पर हालात बेकाबू हो गए। प्रशासन ने तुरंत अखाड़ों से अपील की- स्नान के लिए न जाएं। इसके बाद अखाड़े के साधु-संत शिविर में लौट आए। साधु-संतों ने बैठक की। पहले तय हुआ कि अखाड़ों के साधु-संत मौनी अमावस्या पर स्नान नहीं करेंगे।
अब स्थिति सामान्य है, तो अखाड़े फिर से संगम में डुबकी लगाने जाएंगे। दैनिक भास्कर से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पूरी ने बताया, ‘अमृत स्नान करेंगे। कोई बड़ा जुलूस नहीं निकालेंगे।’
सुबह 9 बजे तक 2.78 करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई है। महाकुंभ मेले और प्रयागराज शहर में इस समय करीब 10 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु मौजूद हैं। वहीं, अब तक 19.94 करोड़ लोग महाकुंभ में स्नान कर चुके हैं। प्रशासन की कोशिश है कि आसपास के घाटों पर स्नान करके श्रद्धालुओं को वापस किया जाए।
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पुलिस जवानों ने संगम के कई घाटों को खाली करा दिया है। पांटून पुल नंबर 3 से 8 तक खाली हैं। इन पुलों से चलकर अखाड़े के साधु-संत संगम नोज तक आएंगे और स्नान करके वापस जाएंगे।
संगम नोज की तरफ जाने वाला एक रास्ता पूरी तरह खाली करा लिया गया है। पूरे रास्ते में RAF और पुलिस के जवान तैनात हैं। कुछ देर में इस रास्ते से अखाड़े के साधु संत स्नान करने संगम नोज पर जाएंगे।
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, यह सनातन का अमृत काल है। मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के दौरान यहां आने वाले सभी लोगों को मौन रहना चाहिए और ध्यान, प्रार्थना और भजन में लीन होना चाहिए। उन्हें अपने हृदय में कृतज्ञता रखनी चाहिए। जब इस तरह की भीड़ होती है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अगर हर कोई सावधान रहेगा, तो सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहेगा। यहां आने वाले सभी भक्तों को धैर्य रखने की जरूरत है। धर्म की पहली विशेषता धैर्य है। भले ही हर कोई संगम जाना चाहता हो, लेकिन यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, इसलिए आप जहां भी हों, अपने नजदीकी घाट पर जा सकते हैं, क्योंकि संगम से पानी का प्रवाह प्रयागराज के हर घाट तक जरूर पहुंचेगा।
प्रशासन ने तीनों शंकराचार्य के स्नान का समय बदला है। अब सुबह 11 बजे अमृत स्नान कराया जाएगा। सेक्टर 22 से तीनों शंकराचार्य एक साथ स्नान के लिए निकलेंगे।
मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने अखाड़ों के अमृत स्नान की तैयारी शुरू करवा दी है।
अखाड़ों के अमृत स्नान के लिए पुलिस और CRPF के जवानों ने रास्ता खाली कराया है। श्रद्धालुओं से हटने की अपील की जा रही है। माइक से अनाउंसमेंट किया जा रहा है कि जल्द से जल्द संगम नोज के रास्तों को खाली करें।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा कि आज अमावस्या है, इसलिए जहां भी हैं, वहीं स्नान कर लें। बराबर पुण्य मिलेगा। हम किसी से नाराज नहीं हैं। भगदड़ मचने को लेकर हमें दुख है। इतनी बड़ी घटना नहीं थी, जितना बड़ा बना दिया गया। इसलिए हमने अमृत स्नान नहीं करने का फैसला लिया था। अब स्थिति सामान्य है। इसलिए अमृत स्नान करेंगे। अफवाहों को न मानें।
मौनी अमावस्या के अवसर पर त्रिवेणी संगम में ‘अमृत स्नान’ के लिए महाकुंभ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आज सुबह 9 बजे तक 2.78 करोड़ लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई है। बीते 16 दिन में 19.94 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी का नया बयान सामने आया है। उन्होंने कहा- 10 बजे के बाद अखाड़े अमृत स्नान कर सकते हैं। हम लोग जुलूस छोटा रखेंगे। किसी प्रकार का कोई लाव लश्कर नहीं होगा। शोभा यात्रा भी नहीं निकाली जाएगी।
तीनों पीठ के शंकराचार्य पहली बार एक साथ अमृत स्नान करेंगे। सुबह 9 बजे अमृत स्नान के लिए तीनों शंकराचार्य निकलेंगे।
हेमा मालिनी ने कहा, “महा स्नान के शुभ अवसर पर मुझे यहां पावन स्नान करने का अवसर मिला। ये मेरा सौभाग्य है। बहुत अच्छा लगा। करोड़ों लोग आए हुए हैं।”
बाबा रामदेव और मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने संगम में डुबकी लगाई।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा, “जो घटना हुई उससे हम बहुत दुखी हैं। हमारे साथ हजारों श्रद्धालु थे… जनहित में हमने फैसला किया कि अखाड़े आज स्नान में भाग नहीं लेंगे… मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे आज के बजाय वसंत पंचमी पर स्नान के लिए आएं… यह घटना इसलिए हुई क्योंकि श्रद्धालु संगम घाट पहुंचना चाहते थे, इसके बजाय उन्हें जहां भी पवित्र गंगा दिखे, वहीं डुबकी लगा लेनी चाहिए।”
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा- मेला प्रशासन का मेरे पास फोन आया था। मुझसे जुलूस रोकने का आग्रह किया है। मैंने अपने अखाड़े का जुलूस अंदर ही रोका है। सभी 13 अखाड़े, अब 3 फरवरी को वसंत पंचमी के दिन स्नान करने जाएंगे।
मौनी अमावस्या पर ‘अमृत स्नान’ के लिए संगम के घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। ये वीडियो ड्रोन से लिया गया है।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने सभी संतों से अपील की है सभी अखाड़े और संत अपने शिविर में वापस जाएं। हम लोग बसंत पंचमी के दिन 3 फरवरी को स्नान करेंगे
मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाने के लिए भोर में अखाड़ों के नागा साधु और संन्यासी संगम निकले थे। भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन ने अखाड़ों से अपील की- अभी स्नान के लिए न जाएं। इसके बाद अखाड़े के साधु-संत शिविर में लौट आए। यहां साधु-संत बैठक कर रहे हैं। इसके बाद तय होगा कि अखाड़ों का स्नान कब होगा।
मौनी अमावस्या पर ‘अमृत स्नान’ के लिए त्रिवेणी संगम के घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इकट्‌ठा हुए। एक दिन पहले मंगलवार को 5 करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई थी।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व क्या है? इसे जानने के लिए हमने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरजा शंकर शास्त्री से बातचीत की। उन्होंने बताया- मौनी अमावस्या ही मुख्य स्नान है। कुंभ भी इसी के इर्द-गिर्द हुआ करता है। पुराणों में कहा गया है कि वृष राशि में बृहस्पति, मकर राशि में सूर्य और चंद्रमा हों तो कुंभ महापर्व का योग बनता है।
सबसे महत्वपूर्ण ये है कि मकर में चंद्रमा सिर्फ 2 दिन के लिए रहते हैं। इसलिए पूरे कुंभ के दौरान मौनी अमावस्या ही प्रधान माना जाता है। सूर्य आत्मा, चंद्रमा मन और बृहस्पति ज्ञान हैं। सूर्य-चंद्रमा के एकसाथ होने से मौनी अमावस्या पर्व होता है। इस दिन चंद्रमा (मन) का मिलन सूर्य (आत्मा) से होता है। इस कारण चंद्रमा के दर्शन नहीं होते। ये चिंतन ऋषि-मुनियों ने बहुत पहले किया था। अगर मन मौन हो जाए तो वाणी नहीं निकलती है। इसलिए मौन रहकर ही मौनी अमावस्या का स्नान करना चाहिए।
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