हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुद्दे पर उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसान मंगलवार सुबह से सचिवालय के बाहर धरने पर डटे हुए हैं। दिनभर धरना देने के बाद किसानों ने रात भी सचिवालय के बाहर खुले आसमान के नीचे गुजारी। किसानों ने धरना स्थल पर ही लंगर खाया। रात के समय हुक्के गड़गड़ाते रहे और किसान आपस में चर्चा कर आंदोलन की आगामी रणनीति बनाते रहे। किसानों ने बुधवार को भी शाम पांच बजे तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके बाद बैठक कर फैसला लिया जाएगा कि आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए सचिवालय के बाहर ही धरना जारी रखा जाए या अगली रणनीति के तहत कोई दूसरा कदम उठाया जाए।
किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने कहा कि हाईटेंशन बिजली लाइनों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेशभर के किसान लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। सरकार की ओर से नीति में बदलाव किए जाने के बावजूद किसानों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। इसी मांग को लेकर किसान सचिवालय पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक किसानों की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
2022 से चल रहा आंदोलन, नीति में बदलाव से बढ़ी नाराजगी
किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने बताया कि हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे का मुद्दा वर्ष 2022 से प्रदेशभर में उठाया जा रहा है। वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार ने इस संबंध में कानून बनाया, लेकिन किसानों के अनुसार इसमें कुछ कमियां थीं। इसके बाद कानून में संशोधन किया गया। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी 2026 को सरकार ने फिर कानून बनाया, लेकिन करीब तीन महीने बाद इसमें बदलाव कर दिया गया।
इन जिलों के किसान हैं परेशान
कुहाड़ के अनुसार, नए बदलाव में जमीन की बाजार कीमत के आधार पर मुआवजा तय करने के लिए लॉटरी सिस्टम को लागू कर दिया गया, जो किसान हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर किसान धरने-प्रदर्शन करने के साथ बिजली निगम के कार्यालयों का घेराव भी कर चुके हैं। प्रदेश के जींद, सोनीपत, पानीपत, कैथल, हांसी, हिसार और भिवानी में किसानों ने बिजली लाइनों को बिछाने का काम भी रुकवाया है।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के कार्यालय तक पहुंचाने के लिए जुटे किसान
अभिमन्यु कुहाड़ ने बताया कि किसान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल तक अपनी मांग पहुंचाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से किसान एकजुट होकर सचिवालय पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि तीन सितंबर को मनोहर लाल के साथ बैठक हुई थी। इसके तीन दिन बाद केंद्र सरकार की ओर से नई नीति भी लाई गई, लेकिन उनके अनुसार 21 दिन बाद भी इसका गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ था। इससे किसानों की परेशानी बनी हुई है।
किसान नेता के मुताबिक, प्रदेश में करीब 10 हजार किसान मुआवजे की समस्या से प्रभावित हैं। किसानों की मांग है कि सरकार नीति को स्पष्ट करे और जमीन की बाजार कीमत के आधार पर उचित मुआवजा देने की व्यवस्था लागू करे, ताकि बिजली लाइनों से प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
पीआर धान के उठान और भुगतान का मुद्दा भी उठाया
किसान नेता मनोज ने हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे के साथ किसानों ने पीआर धान की खरीद, उठान और भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि पीआर धान के भुगतान में कटौती की जाती है और मंडियों से समय पर उठान नहीं होता। उनका यह भी कहना है कि धान के उठान के लिए किसानों को 200 से 300 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
किसान नेता दिलबाग बिंझौल ने कहा कि मंडियों से धान का उठान तेजी से कराया जाए और किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर मिले। उनका कहना है कि फसल बेचने के बाद भी भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं।
शाम पांच बजे तय होगी आगे की रणनीति
किसानों ने बुधवार को भी सचिवालय के बाहर धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। शाम पांच बजे बैठक कर आंदोलन की आगामी रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। किसान तय करेंगे कि सचिवालय के बाहर धरना आगे भी जारी रखना है या आंदोलन को दूसरे तरीके से आगे बढ़ाना है। फिलहाल किसानों का कहना है कि मुआवजे और धान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने तक वे अपनी मांगों को उठाते रहेंगे।
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