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First India News- Digital Desk
Date: 02-11-26 13:14
नई दिल्लीः राजस्थान देश के स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनेगा. राजस्थान ने 2030 तक 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. सितंबर 2026 तक राज्य की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 51 गीगावाट के पार. नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है. राजस्थान में देश की अनुमानित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा है. राजस्थान की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 45 गीगावाट के पार है. देश की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत है. राजस्थान में प्रतिदिन 5.72 किलोवाट घंटा प्रति वर्ग मीटर सौर विकिरण उपलब्ध है. कुल स्थापित बिजली क्षमता के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है.
पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में राजस्थान देश में पांचवें स्थान पर है. बांसवाड़ा में 2800 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखी गई है. भड़ला सोलर पार्क 2245 मेगावाट क्षमता और 5700 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित है. पूगल में 2450 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना विकसित की जा रही है. नोख में 925 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना, फतेहगढ़ में 1500 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना, फलोदी-पोकरण में 750 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना. राजस्थान में 10 से अधिक बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क विकसित किए जा रहे है. तीन सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले संयुक्त उपक्रम भी विकसित किए जा रहे है.
नवीकरणीय ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता के लिए ऊर्जा भंडारण की चार व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है. पूगल में 6400 मेगावाट घंटा क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित हो रही है. बैटरी स्टोरेज से सूर्यास्त के बाद चार घंटे तक बिजली उपलब्ध कराने की योजना है. इस परियोजना के लिए 73.42 रुपये प्रति यूनिट की दर का उल्लेख है. ग्रिड से जुड़ी स्वतंत्र ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए 6 गीगावाट घंटा क्षमता आवंटित है. डिस्कॉम के फीडर स्तर पर 688 मेगावाट घंटा क्षमता का पायलट प्रोजेक्ट प्रस्तावित है. 33/11 केवी सबस्टेशनों पर 172 मेगावाट क्षमता की छोटी इकाइयां लगाई जाएंगी.
सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापितः
रामपुरा में 900 मेगावाट क्षमता की पंप्ड हाइड्रो परियोजना प्रस्तावित है. रामपुरा परियोजना में 5400 मेगावाट घंटा ऊर्जा भंडारण की क्षमता होगी. राजस्थान में 1800 से अधिक सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित. वर्चुअल और ग्रुप नेट मीटरिंग के माध्यम से सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा उत्पादन रूफटॉप सोलर क्षमता में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है. राज्य में 3.6 गीगावाट से अधिक रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित. पीएम सूर्य घर योजना में 1.4 गीगावाट से अधिक क्षमता दर्ज है. पीएम सूर्य घर योजना के तहत 3.84 लाख लाभार्थियों का आंकड़ा है. पीएम कुसुम योजना के तहत वितरित नवीकरणीय ऊर्जा में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है.
688 सबस्टेशनों के जरिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का संचालन:
कुसुम-ए में 5.6 गीगावाट से अधिक क्षमता स्वीकृत है. कुसुम-ए के तहत 1.8 गीगावाट से अधिक क्षमता विकसित. कुसुम-सी में करीब 5.4 गीगावाट क्षमता स्वीकृत. कुसुम-सी के तहत 3.7 गीगावाट से अधिक क्षमता विकसित. कुसुम-सी योजना के तहत 2.46 लाख पंपों का भी उल्लेख है. राजस्थान में 688 सबस्टेशनों के जरिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का संचालन है. राज्य में 1,15,500 एमवीए से अधिक ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता उपलब्ध है. राजस्थान में 46,300 सर्किट किलोमीटर से अधिक ट्रांसमिशन लाइनें है. पिछले तीन वर्षों में 19,750 एमवीए ट्रांसमिशन क्षमता विकसित की. तीन वर्षों में 2300 से अधिक सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें विकसित है.
5963 किलोमीटर लंबा ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित होगा:
71,475 एमवीए से अधिक क्षमता की ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम जारी है. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 के तहत 22 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है. 5963 किलोमीटर लंबा ग्रीन एनर्जी ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित होगा. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से अतिरिक्त 13,255 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी होगी. 2030 तक 53 गीगावाट क्षमता का राज्य के भीतर ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है. फलोदी और मथानिया में प्लग एंड प्ले मॉडल पर वाणिज्यिक एवं औद्योगिक पार्क विकसित है. इन पार्कों में 50 मेगावाट से शुरुआत करने की योजना है. 1000 मेगावाट से अधिक की परियोजनाओं के लिए भूमि संबंधी राहत, तहसीलदार स्तर पर एससी-एसटी भूमि के रूपांतरण की सुविधा है.
805 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए:
इसके साथ ही 33 केवी तक स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा भी दी जा रही है. डेवलपर कनेक्ट पोर्टल पर 50 गीगावाट से अधिक क्षमता का पंजीकरण. 3.5 गीगावाट से अधिक ग्रिड कनेक्टिविटी की प्रक्रिया पूरी. राजस्थान में 288 स्थानों पर 805 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए. इनमें 52 चार्जिंग स्टेशन राजमार्गों पर स्थापित किए गए. भड़ला में गैर-सौर घंटों की 680 मेगावाट कनेक्टिविटी का उपयोग करने की योजना है. बैटरी स्टोरेज और पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है. राजस्थान की जीएसडीपी करीब 197 अरब डॉलर, 2028-29 तक अर्थव्यवस्था को 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है. विकसित राजस्थान @2047 विजन के तहत 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है.
सीमेंट उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर:
राजस्थान देश का सबसे बड़ा तटवर्ती क्षेत्र से बाहर का कच्चा तेल उत्पादक राज्य है. सीमेंट उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है. राजस्थान में सीमेंट उत्पादन क्षमता 55 मिलियन टन प्रतिवर्ष, जैसलमेर में 16 मिलियन टन अतिरिक्त सीमेंट उत्पादन क्षमता विकसित होने की संभावना है. देश के कुल संगमरमर, स्लेट और बलुआ पत्थर का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन राजस्थान में है. सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलास्टोनाइट का राजस्थान देश में एकमात्र उत्पादक है. तिलहन उत्पादन में राजस्थान देश में पहले स्थान पर है. पशुधन, दूध और मूंगफली उत्पादन में राजस्थान दूसरे स्थान पर है. एमएसएमई क्षेत्र में राजस्थान देश में चौथे स्थान पर है. राजस्थान में करीब 31.6 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित है. निवेशकों की सुविधा के लिए राजनिवेश सिंगल विंडो व्यवस्था है. 18 से अधिक विभागों की 170 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध है.
स्वच्छ ऊर्जा निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नई नीतियां लागू:
भूमि आवंटन, अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया डिजिटल की गई है. डेवलपर कनेक्ट पोर्टल पर पंजीकरण और ग्रिड कनेक्टिविटी की पेपरलेस व्यवस्था है. डीआरई-पीएमटी प्लेटफॉर्म पर आवेदन, मंजूरी और सब्सिडी की निगरानी एकीकृत बिजली उत्पादन की निगरानी भी डीआरई-पीएमटी प्लेटफॉर्म से होगी. एआई आधारित डिजिटल ट्विन से बिजली वितरण नेटवर्क का रियल टाइम डिजिटल मॉडल तैयार होगा. राजस्थान में स्वच्छ ऊर्जा निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नई नीतियां लागू. राजस्थान इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी-2024 लागू, राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम-2024 के जरिए निवेश को प्रोत्साहन है. इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2022 और ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस रेगुलेशन-2025 लागू, एमएसएमई पॉलिसी-2024 और टेक्सटाइल एवं अपैरल पॉलिसी-2025 लागू, लॉजिस्टिक्स पॉलिसी-2025 और इंडस्ट्रियल पार्क प्रमोशन पॉलिसी-2026 लागू, एआई-एमएल पॉलिसी-2026 के जरिए तकनीकी निवेश को बढ़ावा है.
निवेश को मिलेगा बढ़ावा:
थार मरुस्थल और पश्चिमी पवन क्षेत्र राजस्थान की ऊर्जा क्षमता की बड़ी ताकत है. सौर ऊर्जा उपकरणों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता से निवेश को बढ़ावा मिलेगा. मुंद्रा और जेएनपीए बंदरगाहों से संपर्क औद्योगिक निवेश के लिए महत्वपूर्ण है. राजस्थान का लक्ष्य केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भंडारण और ट्रांसमिशन को भी मजबूत करना है. स्वच्छ ऊर्जा के साथ विनिर्माण, डिजिटल तकनीक और औद्योगिक निवेश पर भी फोकस है. केंद्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों में राजस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख है. 2030 तक 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य, स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान की बड़ी छलांग है.
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