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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से एक नए मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई गिरफ्तारी को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई. हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन कहा कि इस मामले को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह बात कही. इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं. आजम खान की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी. पीठ ने उनकी दलीलें सुनीं, लेकिन तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने भरोसा दिया कि याचिका इस सप्ताह सुनवाई के लिए आ सकती है.
इससे पहले रविवार को आजम खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था. अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. आजम खान के वकील ने बताया कि उन्हें जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत के सामने पेश किया गया था. पेशी के दौरान अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. भारी सुरक्षा के बीच आजम खान को कोर्ट लाया गया, जहां उनके समर्थकों की भीड़ अपने नेता की एक झलक पाने के लिए मौजूद थी.
78 वर्षीय आजम खान पिछले कई साल से अलग-अलग कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं. रविवार को जब उन्हें अदालत में पेश किया गया, तब कोर्ट परिसर के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक जुटे हुए थे. सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें अदालत के अंदर ले जाया गया. इस मामले में ED की कार्रवाई के बाद अब उनकी गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है.
प्रवर्तन निदेशालय ने आजम खान को 31 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग के नए मामले में गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान कथित दोहरे PAN कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से बाहर आए थे. जेल से रिहाई के कुछ ही समय बाद ED ने आजम खान को अपनी कार्रवाई के तहत गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उन्हें इस मामले में अदालत में पेश किया गया.
ED ने आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ यह मनी लॉन्ड्रिंग केस उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज 58 FIR के आधार पर शुरू किया है. एजेंसी ने इन FIR में दर्ज आरोपों का संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की थी. ED का आरोप है कि आजम खान और उनके कथित सहयोगियों ने अलग-अलग मामलों में अनियमितताओं को अंजाम दिया. इसी जांच के सिलसिले में एजेंसी पहले भी आजम खान से पूछताछ कर चुकी है.
इस मामले में ED ने 28 अक्टूबर को आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच करने की कार्रवाई की थी. यह यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित है. एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत ये संपत्तियां अटैच की हैं. ED के मुताबिक, इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है. यह कार्रवाई जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का हिस्सा है.
ED का आरोप है कि सरकारी विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया और उस पैसे को निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया गया. एजेंसी के मुताबिक, आजम खान ने राज्य में नगर विकास मंत्री और उत्तर प्रदेश जल निगम से जुड़े अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कथित अनियमितताओं को अंजाम देने में मदद की. हालांकि, ये ED के आरोप हैं, जिनकी जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है.
जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासनिक कार्रवाई भी हो चुकी है. जुलाई में रामपुर विकास प्राधिकरण (Rampur Development Authority) ने यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था. इस आदेश के बाद यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दाखिल की गई थी. वहीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अगस्त में छापेमारी भी की थी. इस दौरान एजेंसी ने आजम खान से पूछताछ की थी. अब इसी मामले में उनकी गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.
आजम खान के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. पिछले कुछ वर्षों में उन्हें अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. अब नए मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार है. अदालत इस सप्ताह याचिका पर विचार कर सकती है.
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