जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस इस समय मुश्किल में खड़ी नजर आ रही है। उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा किए गए कैबिनेट फेरबदल के बाद पार्टी के करीब 20 विधायक केंद्रीय नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक बागी विधायक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अब्दुल्ला परिवार की तरफ से इन्हें मनाने की कोशिश जारी है। सामने आई जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को बागी विधायकों का यह गुट वरिष्ठ नेता और एनसी अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला से मुलाकात कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर में सत्ता संभाल रही नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने सबसे बड़ा सवाल बागी विधायकों के पार्टी से अलग छिटक जाने का है। क्योंकि अगर ऐसा होता है, तो प्रदेश में सत्ता के ऊपर भी खतरा आ सकता है। हालांकि, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र की तरफ पार्टियां तोड़ने की बागी विधायकों की कवायद ठंडे बस्ते में जा सकती है, क्योंकि उनके पास उस तरह का बहुमत नहीं है।
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फारुख अब्दुल्ला की पार्टी पिछले कुछ समय से लगातार आंतरिक विरोध का सामना कर रही है। सबसे पहले श्रीनगर से सांसद रहे सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और सांसदी से इस्तीफा दे दिया। दूसरी तरफ हाल में हुए कैबिनेट विस्तार की वजह से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी अब्दुल्ला परिवार से नाराज चल रहे हैं। नाराजगी के पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि विधायक चाहते हैं कि जिन मंत्रियों ने पद पर रहते हुए दो साल पूरे कर लिए हैं, उन्हें पद से हटा दिया जाए। जबकि केंद्र इसके लिए तैयार नहीं है।
बता दें, 27 अक्तूबर को हुए कैबिनेट विस्तार में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था इसके साथ ही उमर मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। लेकिन विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब छह बार के विधायक मुबारक गुल को इस विस्तार में शामिल नहीं किया गया। इसकी वजह से उनके समर्थक भड़क गए और नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में 20 विधायकों ने भी अलग बैठक कर अपनी नाराजगी जाहिर की। भले ही अभी यह खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बगावत की किसी भी खबर से इनकार किया है।
हाल ही में दूसरी शादी करने वाले उमर अब्दुल्ला राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं। पार्टी के 20 विधायक नाराज हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उमर की सत्ता के ऊपर खतरा बना हुआ है?
90 सीटों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत के लिए 46 विधायकों की जरूरत है। वर्तमान में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन में 54 विधायक हैं। इसमें 6 निर्दलीय और एक सीपीएम विधायक भी शामिल हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के 20 नाराज विधायक अगर पार्टी से इस्तीफा दे देते हैं, और स्पीकर उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लेता है तो ऐसी स्थिति में विधानसभा की प्रभावी संख्या घटकर 70 रह जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में बहुमत की संख्या भी घटकर 36 पर आ जाएगी। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस और उसका पूरा गठबंधन भी मिलाकर केवल 33 के आंकड़े तक पहुंच पाएंगे। ऐसी स्थिति में सरकार के लिए खतरा बन जाएगा।
भारतीय राजनीति ने पिछले कुछ वर्षों में पार्टियों के टूटने और अलग होने के बड़े किस्से देखें हैं। सवाल यही है कि क्या जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा हो सकता है? बागी विधायकों की 20 वाली संख्या देखकर ऐसा होना संभव नहीं लगता। कानून के मुताबिक विधायक अगर किसी और पार्टी में विलय करते हैं, तो विधायी दल के कम से कम दो तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 सदस्यों के मामले में यह संख्या 28 बैठती है। ऐसे में अगर 20 विधायक अलग होने की कोशिश भी करते हैं, तो उनका सफल होना संभव नहीं है।
फिलहाल फारुख और उमर अब्दुल्ला की सबसे बड़ी कवायद नाराज विधायकों को मनाने की है। उनके सामने चुनौती है कि वह कैसे इतनी बड़ी संख्या में नाराज विधायकों को अपने खेमे में वापस ला सकते हैं।
उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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