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China ने दावा किया है कि उन्होंने स्टार वॉर्स (Star Wars) मूवी के डेथ स्टार (Death Star) से प्रेरित होकर बीम वेपन (Beam Weapon) बनाया है. अब जिन्होंने स्टार वार्स फिल्म नहीं देखी उन्हें कैसे पता चलेगा कि ये किस तरह का हथियार है? आइए आपको बताते हैं…
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आठ अलग-अलग लेजर बीम यानी किरणों को जोड़कर एक किरण बनाई जाती है. फिर इस किरण से दुश्मन की ओर हमला किया जाता है. इस सुपर पावरफुल किरण से पूरा का पूरा प्लैनेट तबाह हो जाता है. इस किरण को फेंकने वाला डेथ स्टार पूरे के पूरे अल्डेरान को खत्म कर देता है. तबाह कर देता है.
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चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने ऐसा हथियार बनाया है जो कई हाई-पावर इलेक्ट्रोमैग्निक किरणों को जोड़कर एक नए तरह की माइक्रोवेव किरण बना सकते हैं. इससे दुश्मन की ओर टारगेट कर सकते हैं. माइक्रोवेव को छोड़ने के लिए मशीने हैं. जिन्हें अलग-अलग तरह की गाड़ियों पर तैनात किया गया है.
अलग-अलग गाड़ियों पर सवार माइक्रोवेव इमिटर
ये गाड़ियां अलग-अलग लोकेशन से ताकतवर माइक्रोवेव किरणें छोड़ती हैं. फिर इन किरणों को बेहद अधिक सटीकता और सिंक्रोनाइजेशन के साथ जोड़ा जाता है. फिर उसे दुश्मन की ओर फेंक दिया जाता है. इस तकनीक को मैनेज करना बेहद मुश्किल है क्योंकि माइक्रोवेव किरणों को नियंत्रित करके दुश्मन की ओर फेंकना आसान वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं है. यह सेकेंड के करोड़वें हिस्से में होने वाला काम है.
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सटीकता का ही सारा गेम है, नहीं तो हथियार बेकार
चीन की बीडोऊ सैटेलाइटर नेविगेशन सिस्टम वैज्ञानिकों को 0.4 इंच यानी एक सेंटीमीटर की सटीक पोजिशनिंग देता है. लेकिन नए हथियार के लिए यह काफी नहीं है. इस समस्या से उबरने के लिए चीन ने लेजर-रेंजिंग ऑक्सिलरी पोजिशनिंग डिवाइसेस का इस्तेमाल किया. ताकि मिलिमीटर के स्तर पर पोजशिनिंग मिल सके. 
फाइबर ऑप्टिक्स की मदद से जोड़ रहे हैं हथियार के हिस्से
फायरिंग सेकेंड के 170वें ट्रिलियंथ हिस्से में होना चाहिए. यानी 170 लाख करोड़वें हिस्से में. इतनी सटीकता इंसानी दिमाग के हिसाब से बहुत ज्यादा है. लेकिन चीन ने दावा किया है कि उसने ऐसा कर लिया है. क्योंकि घर में मौजूद साधारण सा कंप्यूटर कोई भी सिंगल प्रोसेसिंग साइकल एक सेकेंड के 330 लाख करोड़ हिस्से में कर देता है. इस समस्या से बचने के लिए चीन के वैज्ञानिकों ने फाइबर ऑप्टिक्स की मदद ली.
लैब में तैयार किया होगा हथियार, जंग में उतारना मुश्किल
माइक्रोवेव किरणें ज्यादा दूरी के लिए सफल नहीं हो सकती हैं. क्योंकि इन्हें धूल और नमी छितरा देती हैं. इन्हें एक सीधी रेखा में कहीं पहुंचाने के लिए इनकी ताकत बढ़ानी होती है. लेकिन ऐसा करने के लिए बहुत ही ज्यादा ताकतवर लॉजिस्टिक सपोर्ट चाहिए. बड़े और सटीक यंत्र चाहिए. हो सकता है चीन ने एक नियंत्रित माहौल में ऐसा हथियार बना लिया हो, लेकिन इसे जंग के मैदान में उतारना आसान नहीं होगा.
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