Bangladesh News: नई किताबों में मुजीबुर रहमान की भूमिका को कम करके बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले अन्य नेताओं को शामिल किया गया है. कक्षा 6 की अंग्रेजी की किताब से मुजीबुर के साथ इंदिरा गांधी की तस्वीरें हटा दी गई हैं.
Bangladesh new conspiracy: बांग्लादेश सरकार स्कूली पाठ्यपुस्तकों में बड़े बदलाव कर रही है. बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज लोग पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की विरासत, उनके पिता मुजीबुर रहमान की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका और 1971 के मुक्ति संग्राम में भारतीय नेतृत्व के योगदान को काफी हद तक मिटाने के प्रयास में लगे हैं.
बांग्लादेश के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक बोर्ड (NCTB) ने प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक छात्रों द्वारा उपयोग की जाने वाली 441 किताबों में संशोधन किया है. देश के दैनिक अखबार द डेली स्टार के अनुसार, 2025 शैक्षणिक वर्ष के लिए 40 करोड़ से अधिक किताबें तैयार की जा रही हैं.
बता दें कि ये बदलाव अंतरिम सरकार द्वारा बांग्लादेश पर कब्जा करने के बाद हो रहे हैं. अवामी लीग की नेता शेख हसीना के 16 साल के शासन का अंत कर दिया गया. उन्हें 5 अगस्त, 2024 को सत्ता से हटा दिया गया था और तब से वे भारत में रह रही हैं.
आइए बांग्ला स्कूल की किताबों में किए गए बदलावों पर नजर डालें.
मुजीबुर रहमान की विरासत को मिटा दिया गया
किताबों में सबसे बड़े बदलावों में बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान की भूमिका को कम करना और अन्य नेताओं को शामिल करना शामिल है. ये अन्य लोग वे हैं जिन्होंने ‘मुक्तियुद्ध’ (बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम) में भाग लिया था और जो उनकी बेटी शेख हसीना और अवामी लीग के आलोचक थे. मुजीबुर रहमान ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का नेतृत्व किया था.
राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एकेएम रेजुल हसन ने किताबों में जो बदलाव हुआ है, उसके बारे में बताया. किताबों में अब छपा है, ’26 मार्च, 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की और 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से स्वतंत्रता की एक और घोषणा की.’
जियाउर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के संस्थापक और वर्तमान बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया के पति थे.
शेख हसीना के दूसरी बार सत्ता में आने के एक साल बाद, 2010 से ही पाठ्यपुस्तकों में उल्लेख किया गया है कि मुजीबुर रहमान ने 26 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार किये जाने से ठीक पहले एक वायरलेस संदेश के माध्यम से स्वतंत्रता की घोषणा की थी.
बांग्लादेश की आजादी की घोषणा किसने की, यह सवाल हमेशा से विवादित रहा है. आवामी लीग के समर्थकों का कहना है कि मुजीबुर रहमान ने यह घोषणा की थी और जियाउर रहमान (जो सेना के मेजर और मुक्ति संग्राम के सेक्टर कमांडर थे) उन्होंने मुजीब के निर्देश पर केवल घोषणा पढ़ी थी. हालांकि, बीएनपी के समर्थकों का मानना है कि उनकी पार्टी के संस्थापक और देश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने यह घोषणा की थी.
बांग्लादेश की आजादी में कटौती में भारत की भूमिका
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 6 की अंग्रेजी की किताब से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मुजीबुर रहमान की दो तस्वीरें हटा दी गई हैं. ये तस्वीरें उस समय ली गई थीं जब मुजीब 6 फरवरी, 1972 को कोलकाता में एक रैली में भाषण दे रहे थे और गांधी मंच पर मौजूद थी. दूसरी तस्वीर 17 मार्च, 1972 की है, जब बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने ढाका हवाई अड्डे पर भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत किया था.
हालांकि, कक्षा 5 की पाठ्यपुस्तक में ‘पाकिस्तानी बहिनिर अंतमोसमर्पण ओ अमादेर बिजॉय (पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण और हमारी जीत)’ शीर्षक वाला एक अध्याय बरकरार रखा गया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि कैसे भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को हराने के लिए बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ भाग लिया था.
अन्य परिवर्तनों में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान को पाठ्यपुस्तकों के पिछले पन्नों पर ले जाना शामिल है, जिन्हें अवामी लीग के आलोचक मुजीब की विरासत और भारत द्वारा थोपा हुआ मानते हैं.
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार हसन ने भारत से संबंधित एक और बदलाव का जिक्र किया, ‘पुरानी किताबों में लिखा है कि भारत ने 6 दिसंबर, 1971 को बांग्लादेश को (एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में) मान्यता देने वाला पहला देश था. हालांकि, हमें बताया गया कि भूटान ने 3 दिसंबर, 1971 को बांग्लादेश को मान्यता देने वाला पहला देश था. चूंकि हमारे पास समय कम था, इसलिए हम इसे ठीक नहीं कर पाए. हम इसे अगले साल ठीक कर देंगे.’
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