भारत एक महान देश और… सुनीता विलियम्स को याद हैं अपनी जड़ें, पिता का जिक्र कर बताया 'इंडिया टूर' का प्लान – News18 Hindi

नई दिल्ली: भारत की बेटी सुनीता विलियम्स को अपनी जड़ें याद हैं. अमेरिका में रहने के बाद भी सुनीता विलियम्स को भारत से प्यार है. उन्हें भारत और यहां के लोकतंत्र पर गर्व है. अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जब सोमवार को मीडिया से मुखातिब हुईं तो उनकी जुबान पर इंडिया-इंडिया ही छाया था. अंतरिक्ष में 9 महीने फंसे रहने के बाद बीते दिनों सुनीता विलियम्स धरती पर लौटी हैं. इंटरनेशल स्पेस स्टेशन से घर वापसी पर वह बेहद खुश हैं. नासा एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने सोमवार को मीडिया से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में उनकी परेशानी को दुनियाभर के न्यूज मीडिया ने प्रमुखता से कवर किया, यह जानकर वह हैरान भी हैं और विनम्र भी.
वहीं, उन्होंने अपनी संभावित भारत यात्रा पर खुलकर बात की. भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने कहा, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने पिता के देश और अगले एक्सिओम मिशन पर जाने वाले भारतीय नागरिकों से भी मिलूंगी. उम्मीद है कि मैं उनसे कभी न कभी मिलूंगी और हम अपने अनुभव साझा कर सकेंगे. भारत एक महान देश है और एक अद्भुत लोकतंत्र है जिसने अंतरिक्ष उद्योग में अपना कदम रखा है. हम इसका हिस्सा बनना और उनकी मदद करना पसंद करेंगे.’ हालांकि, वह कब भारत आएंगी, इसकी तारीख तय नहीं है.
सुनीता ने अंतरिक्ष में क्या किया
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में इतने दिनों क्या-क्या किया, यह भी बताया. उन्होंने कहा, ‘हमें क्या पता था कि धरती पर क्या हो रहा है. दुनिया हमारे इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि हम ही दुनिया के इर्द-गिर्द घूम रहे थे.’ उन्होंने आगे बताया कि अंतरिक्ष में वह और उनके साथी बुच विलमोर ‘टनल विजन’ की तरह सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे.उन्होंने आम लोगों के साथ-साथ एस्पेसएक्स का शुक्रिया किया. यहां ध्यान देने वाली बात है कि सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष गईं तो वह अपने साथ भगवान गणेश की मूर्ति ले गई थीं. इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर छाई थीं.
क्या है एक्सिओम मिशन?
एक्सिओम मिशन (Axiom Mission) एक निजी अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है. इसे अमेरिकी कंपनी एक्सिओम स्पेस संचालित करती है. इसका मकस इंटरनेशन स्पेस स्टेशन (ISS) पर वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विकास और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. एक्सिओम-4 मिशन में भारत की भागीदारी महत्वपूर्ण है. इसके तहत ही भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मिशन पायलट के रूप में ISS जाएंगे. यह इसरो और नासा के सहयोग का हिस्सा है, जो भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान, को मजबूत करेगा. इससे भारत को उन्नत प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अन्वेषण में बढ़त मिलेगी.
सुनीता का भारत से नाता
सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं. उन्हें अंतरिक्ष परी कहा जाता है. उनका भारत से गहरा नाता है. उनका जन्म 19 सितंबर 1965 को ओहियो, अमेरिका में हुआ था. उनके पिता पांड्या पंड्या भारतीय थे और गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखते हैं. जबकि उनकी मां स्लोवेनियाई मूल की हैं. सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पांड्या का पैतृक गांव गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित झुलासन है. यह गांव गुजरात की राजधानी गांधीनगर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है. दीपक पांड्या का जन्म यहीं हुआ था, और 1957 में वे मेडिकल पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए थे. सुनीता का इस गांव से गहरा नाता है, और वे 2007 और 2013 में अपने अंतरिक्ष मिशनों के बाद यहां आ चुकी हैं.

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