ईडी के एक फैसले के बाद कांग्रेस अब तक की सबसे बड़ी मुसीबत में फंसती हुई दिख रही है. प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही सैम पित्रोदा और सुमन दुबे के ख़िलाफ़ पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है. ये नेशनल हेराल्ड केस वही केस है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी को ज़मानत मिली हुई है और जिसको लेकर बीजेपी हमेशा उनको कहती आई है कि ये लोग तो बेल पर बाहर घूम रहे हैं. ऐसे में आज आपको तफ़सील से बताते हैं इस नेशनल हेराल्ड की वो कहानी, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुख्य आरोपी बन गए हैं और जिसमें दोषी साबित होने पर उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है. हलो मैं हूं सृष्टि और आप देख रहे हैं एबीपी लाइव. इस कहानी को शुरू से शुरू करते हैं. साल 1938 से. तब से तब जवाहर लाल नेहरू ने एक कंपनी बनाकर तीन अख़बार शुरू किए. कंपनी का नाम था AGL. यानि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड. इस कंपनी के बैनर तले अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, उर्दू में कौमी आवाज़ और हिंदी में नवजीवन अख़बार शुरू हुआ. अख़बार लगभग 80 साल तक छपे और साल 2008 में इसका प्रकाशन बंद हो गया. चूंकि विरासत नेहरू की थी तो इसको बचाने के लिए कांग्रेस आगे आई. 26 फरवरी 2011 को कांग्रेस ने इस कंपनी के सारे खर्चे की जिम्मेदारी अपने सिर ले ली. और इसके लिए कांग्रेस ने क़रीब 90 करोड़ रुपये खर्च किए. कंपनी के हिसाब से देखें तो कांग्रेस ने एजीएल कंपनी को 90 करोड़ रुपये का कर्ज दे दिया.
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