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पोलिंग स्टेशन पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1200 से बढ़ाकर 1500 किए जाने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है.
कोर्ट ने आयोग से तीन हफ्ते में पूरी प्रक्रिया को विस्तार से बताते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा. CJI संजीव खन्ना की बेंच ने चुनाव आयोग से यह बताने को कहा है कि एक ईवीएम से 1500 तक वोट किए जा सकते हैं. ऐसे में वो 1500 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केन्द्र की जरूरतों को कैसे पूरा करती है?
साथ ही यह भी बताने को कहा है कि यदि एक मशीन में प्रति घंटा केवल 45 वोट डाले जा सकते हैं तो वह सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे के दौरान शत-प्रतिशत मतदान होने पर सभी 1500 वोटों को कैसे समायोजित कर सकती है? वहीं चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट और पूर्व ASG मनिंदर सिंह ने कहा कि इस मामले में नोटिस जारी नहीं किया जाना चाहिए.
ये प्रति बूथ अधिकतम 1500 वोटर की सीमा वास्तव में 2019 से ही लागू है. तब से किसी ने शिकायत नहीं की. वास्तविकता ये है कि अगर सभी लोग दोपहर 3 बजे आने लगें तो क्या किया जा सकता है? जब आप सुबह जाते हैं तो कोई भीड़ नहीं होती. ईवीएम के खिलाफ पहले भी बहुत सारे आरोप लगाए जा चुके हैं और अभी भी लगाए ही जा रहे हैं.
जहां तक 10 से 11 घंटे में 1500 वोट डालने की बात है तो तय समय सीमा में जितने भी वोटर पोलिंग सेंटर की सीमा में दाखिल हो जाते हैं उनको वोट करने दिया जायेगा चाहे कितना भी समय लग जाए. कई बार तो आधी रात तक वोटिंग चलती रहती है. ये तो पोलिंग सेंटर में वोटिंग की समय सीमा के तक मतदाताओं की बूथ में उपस्थिति से तय होता है.
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