Motihari News: मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय के अधिकारी नहीं एक किरानी चलाते है यह बात तब और ज्यादा स्पष्ट हो गई जब उक्त किरानी के इशारे पर जिला शिक्षा कार्यालय ने हास्यास्पद तरीके से जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद उसके साथ छेड़छाड़ शुरू हो गई.
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मोतिहारीः Bihar News: बिहार के मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय के अधिकारी नहीं एक किरानी चलाते है यह बात तब और ज्यादा स्पष्ट हो गई जब उक्त किरानी के इशारे पर जिला शिक्षा कार्यालय ने हास्यास्पद तरीके से जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद जांच रिपोर्ट की दिशा को घुमा के दोषी कर्मियों को बचाने की कवायद शुरू कर दी गई. हालांकि उक्त किरानी का प्रयास कितना सफल होता है यह तो वक्त बताएगा.
जिला शिक्षा कार्यालय से निकला पत्रांक 3044 दिनांक 4-12-24 की खूब चर्चा हो रही है. उक्त पत्रांक में जिला शिक्षा कार्यालय ने जांच दल की जांच रिपोर्ट पत्रांक 6834 दिनांक 22-11-24 को अपूर्ण बताते हुए पुनः जांच करने का निर्देश दिया है. अब मामला यही से दिलचस्प हो जाता है. जिन बिंदुओं पर जिला शिक्षा कार्यालय ने जांच को अपूर्ण बताते हुए जांच करने का द्वारा निर्देश जांच टीम को दिया है. उन तमाम बिंदुओं का जिक्र समर्पित किए गए जांच रिपोर्ट पत्रांक 6834 में साफ तौर पर किया जा चुका है.
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जिला शिक्षा कार्यालय ने द्वारा जांच के लिए शिक्षकों का नाम और रिश्वत देने के कारणों की जांच करने को कहा है. जबकि उक्त बातें समर्पित की गई जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा हुआ है तो अब सवाल उठता है कि जब जांच दल के द्वारा स्पष्ट जांच रिपोर्ट समर्पित किया जा चुका है तो दोषी कर्मी पर कार्रवाई करने के बजाए जांच की दिशा को क्यों घुमाया जा रहा है. इसको समझने के लिए पूरी घटना को समझना होगा. यह भी समझना होगा कि मोतिहारी के शिक्षा महकमे में आखिर रिश्वतखोरी क्यों नहीं रुकती है.
दरअसल, ढाका के दोनों बीपीएम ढाका प्रखंड के स्कूलों में घूमकर शिक्षकों पर पैसा के लिए दबाव बनाते थे. जिसके बाद प्रखंड शिक्षा कार्यालय में शिक्षक पहुंचकर बीपीएम को ई शिक्षा कोष में हाजिरी को लेकर रिश्वत दे रहे थे. जिसका वीडियो भी शिक्षकों ने बना लिया था. तब रिश्वत का वीडियो के साथ आवेदन लिखकर ढाका के प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी को शिक्षकों ने दिया था.
अपने आवेदन में आधा दर्जन से ज्यादा शिक्षकों ने हस्ताक्षर करते हुए कहा था कि ढाका प्रखंड के दोनों बीपीएम मोहम्मद फरीद और सुमित कुमार उन पर उगाही के लिए दबाव बनाते है. शिक्षकों के द्वारा रिश्वत का आवेदन और वीडियो मिलने की बात प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में स्वीकार किया था, पर मामला दब गया था. जब रिश्वत वाले वीडियो के साथ शिक्षकों का लिखित शिकायत मीडिया के हाथों में लगा, तब नींद से जिला शिक्षा कार्यालय जगा था वो भी तब जब मोतिहारी के डीएम सौरभ जोरवाल ने मामले पर संज्ञान लिया था.
डीएम के संज्ञान लेने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए एक बीपीएम का सेवा समाप्त कर दिया गया था. पैरवी पुत्र दूसरे बीपीएम पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. बताया जाता है कि उक्त बीपीएम को जिला शिक्षा कार्यालय के चर्चित किरानी का आशीर्वाद प्राप्त था. उक्त किरानी के आशीर्वाद का ही नतीजा रहा कि आज उक्त बीपीएम पर गठित जांच दल के जांच रिपोर्ट में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की, अनुशंसा हो जाने के बावजूद जिला शिक्षा कार्यालय ने जांच को अपूर्ण बताया है.
अमूमन कहीं भी जांच टीम की रिपोर्ट के आ जाने के बाद कार्रवाई होती है पर मोतिहारी का शिक्षा विभाग है जहां मनमाफिक जांच रिपोर्ट के आने तक या फिर लोगों के भूल जाने तक जांच चलता रहता है.
इनपुट- पंकज कुमार
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