ईरान में कुछ भी होता है तो अमेरिका और इजरायल की धड़कनें बढ़ जाती हैं. लेकिन इस बार ईरान ने धरती से 400 किलोमीटर ऊपर आसमान में ऐसा कारनामा किया है कि देखकर अमेरिका और इजरायल की टेंशन बढ़ गई है. वे हर हाल में इस कोशिश को रोकना चाहते थे, लेकिन इस बार सफल नहीं हो पाए. ईरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने अंतरिक्ष में एक सफल प्रक्षेपण किया है, जो उसके नए प्रयोग का हिस्सा है. जैसे ही यह जानकारी पश्चिमी देशों को हुई, उनके कान खड़े हो गए. उन्होंने कहा, तेहरान खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है, जिसे स्पेस में लॉन्च करने की तैयारी है. यह दुनिया के लिए खतरे की बात होगी.
ईरान ने दावा किया कि उसने अपने सिमोर्ग प्रोग्राम का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसा सैटेलाइट लॉन्च किया है, जो स्पेसक्राफ्ट की आर्बिट को (Orbital Propulsion System) बदल सकता है. इससे पहले ईरान का सिमोर्ग प्रोग्राम कई बार फेल हो चुका था. पहली बार उसने सफल प्रक्षेपण किया है. सैटेलाइट को धरती से 400 किलोमीटर ऊपर सेट किया गया है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इसमें परमाणु हथियार भी हो सकता है और इसका मकसद देश के ऊपर आने वाले संकट को हवा में ही ध्वस्त करना है. ईरान लंबे समय से इस सैटेलाइट की तलाश में था. उसके कई परीक्षण फेल हो चुके थे.
क्या रखा है इस सैटेलाइट में
ईरान ने इस सैटेलाइट में 300 किलो का पेलोड भी रखा है. एक्सपर्ट का कहना है कि जरूरत पड़ने पर यह न्यूक्लियर पेलोड भी हो सकता है. यह ऐलान ऐसे वक्त में किया गया है, जब मिडिल ईस्ट में हमास, हिजबुल्लाह की इजरायल से जंग चल रही है. अमेरिका ने पहले कहा था कि ईरान परमाणु हथियार ले जाने वाली इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है, अगर वह कामयाब हुआ तो पूरी दुनिया में तबाही मच जाएगी. अमेरिका ने यह भी कहा था कि ईरान सिमोर्ग प्रोग्राम के जरिए यह कोशिश कर रहा है. शुक्रवार को इसी सिमोर्ग प्रोग्राम के जरिए ईरान ने सैटेलाइट लॉन्च किया, जो अमेरिका की बात सच होने जैसा है.
ईरान का इरादा क्या
ईरान में जब हसन रूहानी का राज था, तब उन्होंने स्पेस प्रोग्राम को धीमा कर दिया था. लेकिन जब से सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इसमें हाथ डाला, इसमें काफी तेजी आई है. ईरान के मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ संकेत दिए हैं कि तेहरान वह सबकुछ करेगा, जो उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसी के बाद सितंबर में ईरान ने अपने सैनिकों के लिए एक सैटेलाइट लॉन्च किया था. इंटरकॉन्टिनेंट बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल परमाणु हथियारों को ले जाने के लिए किया जा सकता है.
क्यों डर रहे अमेरिका-इजराइल
अमेरिका-इजराइल कह चुके हैं कि ईरान पहले से न्यूक्लियर हथियार में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियन का प्रोडक्शन कर रहा है. उसने कई बम बनाने लायक यूरेनियम इकट्ठा भी कर लिया है. हालांकि, ईरान ने हमेशा परमाणु हथियार बनाने की बात से इनकार किया है. उसने कहा है कि उसका स्पेस प्रोग्राम पब्लिक की जरूरतें पूरी करने के लिए है. लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि 2003 दिसंबर तक ईरान के पास एक सैन्य परमाणु कार्यक्रम है.
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