भारत ने सोमवार (23 जून, 2025) को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की आलोचना करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के प्रभाव में आकर कश्मीर को लेकर उसके बारे में अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत बयान दे रहा है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान वो देश है, जिसने आतंकवाद को एक राजकीय कौशल के रूप में तब्दील कर दिया है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि झूठा प्रोपेगेंडा फैलाने और आतंकवाद और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की अपनी हरकतों को छिपाने के लिए पाकिस्तान ओआईसी का इस्तेमाल कर रहा है, जिसकी अनुमति इन देशों ने भी उसको दी है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘पाकिस्तान किस तरह झूठा प्रोपेगेंडा फैलाने और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ओआईसी का इस्तेमाल करता है.’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओआईसी देशों को भारत के आंतरिक मामलों पर कुछ भी कहने का हक नहीं है. मंत्रालय ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है. यह एक ऐसा तथ्य है, जो हमारे संविधान में निहित है.’
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘ओआईसी के पास भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है जिसमें जम्मू और कश्मीर भी शामिल है, जो भारत का अभिन्न और संप्रभु हिस्सा है- एक ऐसा तथ्य जो भारतीय संविधान में निहित है और यह अपरिवर्तनीय है.’
ओआईसी देशों ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष को दोहराते हुए कहा था, ‘हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, कश्मीरी लोगों की इच्छाओं के अनुरूप, कश्मीर के लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करते हैं.
भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया तुर्किए में ओआईसी के विदेश मंत्री स्तरीय सम्मेलन के बाद आई है, जिसमें भारतीय मुसलमानों को सामाजिक रूप से हाशिए पर धकेलने जैसे आरोप लगाते हुए भारत के खिलाफ बयान दिए गए हैं. ओआईसी ने सिंधु जल संधि सहित भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौतों का सख्ती से पालन करने का आह्वान किया और सभी लंबित विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए व्यापक आधार वाली बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘भारत ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में भारत के बारे में अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है.’
बयान में कहा गया, ‘आतंकवाद को राजकीय कौशल में तब्दील करने वाले पाकिस्तान के इशारे पर ये बयान संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों के लिए ओआईसी मंच के निरंतर दुरुपयोग को दर्शाते हैं.’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के वास्तविक खतरे को स्वीकार करने में ओआईसी बार-बार विफल रहा है जिसका सबसे हालिया सबूत पहलगाम हमले में देखने को मिला, यह तथ्यों के प्रति जानबूझकर की गई उपेक्षा को दर्शाता है.
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