पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश से आईं कुछ खबरें देखिए…
आखिर बांग्लादेश में क्या चल रहा है, वो चाहता क्या है और क्या इससे भारत के लिए मुसीबत खड़ी होगी; इसी टॉपिक पर है आज का एक्सप्लेनर…
सवाल 1: बांग्लादेश की तरफ से भारत की सीमा पर ड्रोन तैनाती का मामला क्या है? जवाबः शनिवार को बांग्लादेशी सूत्रों के हवाले से खबर लिखी गई कि भारत की सीमा पर 6 ड्रोन तैनात किए गए हैं जिन्हें बांग्लादेश की 67th आर्मी यूनिट ऑपरेट कर रही है। हालांकि डिफेंस टेक्नोलॉजी ऑफ बांग्लादेश ने कहा कि ये एक रूटीन एक्टिविटी है। अलग से कोई ड्रोन तैनात नहीं हुआ।
इंडिपेंडेंट पॉलिटिकल एनालिस्ट और मौजूदा डेवलपमेंट पर करीबी नजर रख रहे प्रोफेसर प्रसनजीत बिस्वास के मुताबिक,
यह ड्रोन बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तुर्किये से खरीदे थे। इन्हीं ड्रोन की वजह से यूक्रेन ने रूस को युद्ध में कड़ी टक्कर दी थी। 2020 में अजरबैजान ने आर्मेनिया को मात दी थी।
भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भी अपनी निगरानी बढ़ा दी है। भारत अपनी सबसे लंबी सीमा (4,097 किलोमीटर) बांग्लादेश के साथ साझा करता है। यह सीमा पहाड़ों, उफनती नदियों और घने जंगलों से होकर गुजरती है। इस वजह से भारतीय सेना को ड्रोन को ट्रैक करने में मुश्किल हो सकती है।
भारत ने अपनी ड्रोन क्षमता को बढ़ाने के लिए अक्टूबर 2024 में अमेरिका के साथ 31 प्रिडेटर ड्रोन समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह सौदा 32 हजार करोड़ रुपए में तय हुआ। इनमें से 15 प्रिडेटर ड्रोन्स भारतीय नौसेना को मिलेंगे। 8 ड्रोन वायुसेना और 8 ड्रोन इंडियन आर्मी को दिए जाएंगे।
सवाल 2: बांग्लादेश के बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद आयात करने का मामला क्या है? जवाबः द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना के इस्तीफे के 3 हफ्ते बाद ही केयरटेकर सरकार ने पाकिस्तान को गोला-बारूद का ऑर्डर किया था। इस ऑर्डर में 40 हजार से ज्यादा राउंड गोला-बारूद, 40 टन के 2,900 आरडीएक्स शामिल हैं।
यह ऑर्डर 3 किश्तों में सितंबर से शुरू हुआ था और दिसंबर में पूरा हो जाएगा। इस गोला-बारूद का इस्तेमाल आर्टिलरी गन में किया जाना है, जो 30 से 35 किलोमीटर की रेंज तक हमला कर सकती है। बांग्लादेश तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है और चौथी तरफ बंगाल की खाड़ी है। इससे सवाल उठता है कि बांग्लादेश की सरकार गोला-बारूद का इस्तेमाल कहां करना चाहती है।
सवाल 3: बैंक नोट से शेख मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाने और ढाका में जिन्ना की सालगिरह मनाने के मायने क्या हैं? जवाबः प्रसनजीत बिस्वास के मुताबिक,
बांग्लादेश की केयरटेकर सरकार नोटों पर से मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाकर शेख हसीना की पार्टी को कमजोर करना चाहती है। मुहम्मद यूनुस ने मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाने के लिए 20, 50, 100, 500 और 1,000 टका (बांग्लादेशी करेंसी) के नोट बदलने के आदेश दिए। अगले 6 महीनों में नए नोट मार्केट में आ जाएंगे। इन नोटों पर धार्मिक स्थल और बंगाली परम्परा के चिन्ह बने होंगे।
शेख मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश के संस्थापक और राष्ट्रपिता होने के साथ ही शेख हसीना के पिता भी हैं। वे 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में एक प्रमुख नेता थे, जिन्होंने बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाई थी।
मुहम्मद यूनुस की सरकार ने राष्ट्रपति भवन से मुजीबुर्रहमान की तस्वीरें भी हटा दी हैं। उनके नाम से जुड़ी छुट्टियां भी रद्द कर दी गईं और उनकी मूर्तियों को भी तोड़ दिया गया।
बांग्लादेश में 50 सालों में पहली बार ढाका के नेशनल प्रेस क्लब ने 11 सितंबर को जिन्ना की 76वीं सालगिरह भी मनाई थी। इस जश्न में पाकिस्तान के डिप्टी हाई कमिश्नर कामरान धंगल और यूनुस सरकार के कई लोग भी शामिल हुए थे। इसमें जिन्ना को बांग्लादेश का ‘राष्ट्रपिता’ घोषित करने की मांग की गई।
सवाल 4: बांग्लादेश की केयरटेकर सरकार ने पाकिस्तान से किस तरह नजदीकी बढ़ाई है? जवाबः बांग्लादेशी राजनीति के एक्सपर्ट और ऑस्ट्रेलिया में सिडनी पॉलिसी एंड एनालिसिस सेंटर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुबाशर हसन ने एक इंटरव्यू में कहा,
ऐसा लगता है कि बांग्लादेश भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधार रहा है। बांग्लादेश यह संदेश देना चाहता है कि वह अब साउथ एशियाई राजनीति को भारत के चश्मे से नहीं देखेगा।
मुबाशर हसन के मुताबिक, ‘बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए वीजा सिक्योरिटी क्लियरेंस को खत्म कर दिया है। 2019 में शेख हसीना की सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नॉन ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य किया था। इस सर्टिफिकेट के बिना वीजा नहीं मिल सकता था। लेकिन अब यह प्रोसेस खत्म कर दिया गया है।’
इससे पहले नवंबर 2024 में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधे समुद्री संपर्क की शुरुआत हुई थी। पाकिस्तान के कराची से एक कार्गो शिप बंगाल की खाड़ी होते हुए बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट पर पहुंचा था। तब ढाका में मौजूद पाकिस्तान के राजदूत सैयद अहमद मारूफ ने कहा,
यह शुरुआत पूरे बांग्लादेश में व्यापार को बढ़ावा देने में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा यह मार्ग दोनों देशों के लिए बिजनेस के नए अवसर पैदा करेगा। हम पाकिस्तान के साथ 1971 के मुद्दे को हल करना चाहते हैं। एक लोकतांत्रिक साउथ एशिया के लिए हमें एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने की जरूरत है।
सवाल 5: इन सभी डेवलपमेंट्स से क्या भारत को चिंता करनी चाहिए? जवाबः ऐसे मामलों की स्टडी करने वाले अमेरिका के विल्सन सेंटर के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने एक इंटरव्यू में बताया…
इसके अलावा, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों और इस्कॉन के पूर्व पुजारी चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने हालात ज्यादा खराब कर दिए हैं।
सवाल 6: बांग्लादेश की इन सभी हरकतों पर भारत सरकार ने क्या किया? जवाबः प्रसनजीत बिस्वास के मुताबिक, भारत सरकार ने बांग्लादेश की बॉर्डर पर पहरा बढ़ा दिया है। BSF जवानों की तैनाती भी सख्त कर दी गई है। भारत का विदेश मंत्रालय बांग्लादेश के हथियार खरीद पर भी नजरें बनाए हुए है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, ‘9 दिसंबर को विदेश सचिव विक्रम मिस्री बांग्लादेश जाएंगे। मिस्री मुहम्मद यूनुस की सरकार से भारत और बांग्लादेश के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। मिस्री के दौरे से उम्मीद लगाई जा रही है कि भारत और बांग्लादेश के बीच कोई समाधान निकल सकता है।’
सवाल 7: बांग्लादेश में चुनाव क्यों नहीं हो रहे, केयरटेकर सरकार चाहती क्या है? जवाबः बांग्लादेश में चुनाव कराने की स्थिति शेख हसीना की सरकार के समय से ही नहीं थी। हसीना एक तरफा बहुमत से अपनी सरकार बना लेतीं थीं। यही स्थिति अभी भी जस की तस है। कॉन्स्टीट्यूशनल बॉडी के तौर पर इलेक्शन कमीशन भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम साबित हो रहा है।
प्रसनजीत बिस्वास के मुताबिक, ‘मोहम्मद यूनुस ने चुनाव कराने के लिए यूनाइटेड नेशन्स (UN) एजेंसियों को बुलाया है। लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा। बांग्लादेश में बिगड़ती स्थितियों के बीच चुनाव नहीं करा सकती। एक तरफ जहां माइनॉरिटीज पर अत्याचार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता भी सरकार के विरोध में सड़कों पर उतरी हुई है। यूनुस सरकार को चुनाव कराने के लिए पहले देश के आंतरिक मामलों को खत्म करना पड़ेगा।’
सवाल 8: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में आगे क्या होगा, तनातनी बढ़ेगी या रिश्ते सामान्य होने की उम्मीद? जवाबः प्रसनजीत बिस्वास का कहना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सुलह होने की उम्मीद है। भारत जिस तरह दुनिया में एक ताकतवर देश की छवि बना चुका है। ऐसे में भारत से जंग करना बांग्लादेश के लिए आसान नहीं होगा। बांग्लादेश चीन और पाकिस्तान की मदद से भारत की बॉर्डर पर तनाव जरूर पैदा कर सकता है, लेकिन जंग शुरू करने की हालत में नहीं है।
प्रसनजीत बिस्वास के मुताबिक, ‘दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सामाजिक रिश्तों में खटास जरूर आई है लेकिन आर्थिक रिश्ते पहले की तरह मजबूत हैं। कोई भी सरकार देश चलाने के लिए दूसरे देशों के साथ आर्थिक रिश्ते हमेशा मजबूत रखती है। भारत और बांग्लादेश के बीच पानी, बिजली, आलू, चावल जैसी चीजों का इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट पहले की तरह होता आ रहा है।’
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रिसर्च सहयोग- अनमोल शर्मा
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किस्सा 16 दिसंबर 1971 का है। भारत और पाकिस्तान की जंग शुरू हुए 12 दिन हो चुके थे। भारतीय सेना के मेजर जनरल गंधर्व एस नागरा ने पू्र्वी पाकिस्तान के गर्वनर लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी को फोन किया, “अब्दुल्ला मैं गंधर्व बोल रहा हूं।” नियाजी गंधर्व काे पहचान गए। उन्होंने पूछा, “तुम कहां हो गंधर्व?” जवाब में गंधर्व बोले, “मैं ढाका के गेट पर हूं और तुम्हारे सरेंडर का इंतजार कर रहा हूं।” पूरी खबर पढ़ें…
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