बस्तर की भूमि पर सालों से नक्सलियों का साया रहा है। यहां पर रहने वाले लोग अब अपनी मेहनत से इस परिवेश में रहते हुए अपनी जिद को हकीकत में तब्दील कर नई इबारत लिख रहे हैं। इसमें एक नाम आता है जिले के सोनारपाल में रहने वाले 41 साल के सूर्या ताम्रकार का। ज
सामाजिक सरोकार और कला के क्षेत्र में बेहतर काम करने के चलते सूर्या ताम्रकार को अब तक कई पुरस्कार मिले चुके हैं। कला के क्षेत्र में अब तक कई उपलब्धियों और पुरस्कार से इन्हें नवाजा जा चुका है। ताम्रकार ने कहा कि 27 जुलाई रविवार को धमतरी में संपन्न हुए डॉ एपीजे अब्दुल कलाम राज्य स्तरीय सम्मान समारोह ताम्रकार को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ज्ञान श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। जानकारी के मुताबिक समता साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ द्वारा यह सम्मान उनके शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सेवाओं के लिए प्रदान किया गया। किसान के घर में जन्म लेने वाले इस कलाकार को उसकी दो फिल्मों के लिए पूर्व सीएम रमन सिंह और भूपेश बघेल भी सम्मानित कर चुके हैं। ताम्रकार ने कहा कि आमचो गांव फिल्म के लिए उसे रमन सिंह और गोधन के लिए पूर्व के सीएम ने पुरस्कृत किया था। इसके साथ उनकी आने वाल फिल्म मां हिंगलाज और मां दंतेश्वरी पर आधारित नई आध्यात्मिक फिल्में रिलीज के लिए तैयार हैं।
ये दोनों फिल्में जहां हिंदी में बनाई गई हैं तो वहीं, लाजो की उड़ान नामक महिला सशक्तिकरण पर आधारित फिल्म निर्माणाधीन है, जिसकी शूटिंग वर्तमान में बस्तर के विभिन्न अंचलों में की जा रही है। यह फिल्म शीघ्र ही सेंसर होकर यूएफओ के माध्यम से देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। इसके साथ ही सरपंच फिल्म भी वर्ष 2026 में रिलीज होगी। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए ताम्रकार को उनके मां व पिता द्वारा किसी तरह का कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिला। अपने कॅरियर को कला के क्षेत्र में स्थापित करने के लिए सूर्या ने घरों में पेपर बांटे और स्कूल और कॉलेज में मिलने वाली छात्रवृत्ति और आकाशवाणी और दूरदर्शन में काम करने के बाद वहां से मिले पैसे से आडियो कैसेट बनाना शुरू किया। वर्ष 2012 मेंं फिल्म निर्माण को लेकर वे वाइफा वेस्ट इंडियन फिल्म एसोसिएशन से सदस्यता ली।
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