मेरठ. व्यवसाय को वैश्य समाज की मूल पहचान बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में परिवारों को सहेजने और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत रखने के लिए जरूरी है कि वैश्य समाज के युवक-युवतियां अपनी जड़ों से जुड़े रहें और जीवनसाथी के चयन में समाज के मूल्यों को प्राथमिकता दें।
व्यापारी वर को प्राथमिकता दें
शारदा रोड स्थित नारायण भवन में आयोजित 126वें अग्रवाल युवक-युवती परिचय सम्मेलन में मुख्य अतिथि राजेश एरन ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बड़े संस्थानों में नौकरी के दबाव से उपजा तनाव कई बार वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है, इसलिए वैश्य समाज की लड़कियों को व्यापारी वर को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह आयोजन ग्वालियर स्थित अग्रवाल परिचय सम्मेलन संस्था द्वारा किया गया, जो प्रत्येक माह देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे परिचय सम्मेलन आयोजित करती है। मेरठ में आयोजित इस सम्मेलन में 500 से अधिक युवक-युवतियों का पंजीकरण हुआ और 200 परिवारों ने आपसी मेलजोल से संबंध जोड़े। कार्यक्रम के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी अनिल जिंदल ने कहा कि वैश्य समाज की पहचान व्यापार से है। यदि समाज का युवा वर्ग नौकरी की ओर मुड़ जाएगा तो हमारी पारंपरिक पहचान और सामाजिक संरचना प्रभावित होगी। हमें ऐसे परिवारों को प्रोत्साहित करना चाहिए जो रोजगार सृजन में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर देवेन्द्र गोयल, जयकरण गुप्त, मुकेश बंसल, आयुष जिंदल, अमित गुप्ता, नवनीत गर्ग ”मोनू”, राजीव गुप्ता ”काले”, बी.डी। गुप्त, राकेश गर्ग और मुकेश गुप्त सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विवाह योग्य युवक-युवतियों को मंच देना ही नहीं था, बल्कि वैश्य समाज की सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक एकजुटता को बनाए रखना भी था.आयोजन को समाज में काफी सराहना मिली और प्रतिभागी परिवारों ने इसे सार्थक व उपयोगी बताया।
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