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साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने वाला है. यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण दोपहर को 3 बजकर 20 मिनट पर आरंभ होगा और इसका समापन शाम को 6 बजकर 46 मिनट पर होगा. चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पहले लग जाता है. इस हिसाब से 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर सूतक काल लग जाएगा. आइए जानते हैं कि सूतक काल शुरू होने से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक घर में कौन से कार्य नहीं किए जाते हैं.
सूतक काल में क्या न करें?
1. पूजा-पाठ
सूतक काल लगने के बाद पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान नहीं करने चाहिए. इस अवधि में मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करने से मना किया जाता है. सूतक और ग्रहण काल में केवल मंत्रों का जाप किया जा सकता है.
2. खान-पान
सूतक लगने के बाद खाना बनाना और भोजन करना भी वर्जित है. कहते हैं कि ग्रहण के दुष्प्रभाव से भोजन दूषित हो सकता है. इसलिए पहले से बने भोजन में भी तुलसी के पत्ते डालकर रखने की परंपरा है. ताकि उसकी शुद्धता बनी रहे.
3. गर्भवती महिलाओं
सूतक और ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इस दौरान उन्हें नुकीली व धारदार वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए. छोंक, तड़का आदि जैसे कार्यों से भी परहेज करें. कोई जोखिम न उठाएं. बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर भी न निकलें.
4. बाल-नाखून और दाढ़ी
सूतक काल में नाखून काटने, बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने या तेल मालिश करवाने से भी परहेज करना चाहिए.
5. शुभ-मांगलिक कार्य
चंद्र ग्रहण के साए में नए कार्यों की शुरुआत करने से बचें. लंबी यात्राएं न करें. नई चीजों की खरीदारी न करें. इस दौरान शुभ काम जैसे कि विवाह, सगाई या गृह प्रवेश भी नहीं किए जाते हैं.
ग्रहण के बाद क्या करें?
1. स्नान और शुद्धि करें
चंद्र ग्रहण समाप्त होते ही सबसे पहले स्नान करें. यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करना अच्छा रहेगा. इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है. कुछ लोग लोग पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव भी करते हैं. भगवान की प्रतिमा को भी गंगाजल से स्नान करवाते हैं.
2. पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण
चंद्र ग्रहण साप्त होने के बाद घर के मंदिर को साफ करके देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए. ग्रहण के दौरान बंद रहे मंदिरों के कपाट भी इसी समय खोले जाते हैं. इसके बाद मंत्र जाप, आरती और प्रार्थना करने से पुण्यफल मिलता है.
3. दान-पुण्य करें
चंद्र ग्रहण के बाद दान का विशेष महत्व बताया गया है. ग्रहण समाप्ति के बाद जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, चावल, दूध, चीनी या धन का दान करना अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि इससे ग्रहण के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
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