ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल की जंग में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी सीधे निशाने पर आ गया है. ईरान ने UAE पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की कई लहरें दागीं, जिससे दुबई और अबू धाबी जैसे बड़े शहरों में धमाके हुए, एयरपोर्ट बंद हो गए और हजारों लोग फंस गए.
UAE की एयर डिफेंस ने ज्यादातर हमलों को रोक लिया, लेकिन कुछ डेब्री गिरने से नुकसान हुआ और 3 मौतें हुईं. दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB), दुनिया का सबसे व्यस्त इंटरनेशनल हब, बंद रहा, जिससे ग्लोबल ट्रैवल में भारी अफरा-तफरी मच गई.
ईरान ने UAE पर हमले क्यों किए?
ईरान का कहना है कि UAE में अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं और वो अमेरिका-इजरायल के हमलों में शामिल हैं. UAE ने पहले कहा था कि वो अपना एयरस्पेस ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा, लेकिन ईरान ने फिर भी सिविलियन साइट्स को टारगेट किया. पिछले दो-तीन दिनों में ईरान ने 165 बैलिस्टिक मिसाइलें और 541 ड्रोन्स दागे, जिनमें से ज्यादातर UAE एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर लिए. लेकिन डेब्री गिरने से दुबई में दो घरों के आंगन में नुकसान हुआ और दो लोग घायल हुए.
बुर्ज खलीफा को खाली कराया, लाइट्स बंद की
UAE में कुल 3 मौतें हुईं, जिनमें एक पाकिस्तानी, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल हैं. 58 लोग घायल हुए, जिनमें भारतीय, मिस्री, फिलिपिनो, इथियोपियन, श्रीलंकाई, अफगान और दूसरे देशों के लोग शामिल हैं. दुबई के पॉश इलाकों में धमाके सुनाई दिए, जहां इंटरसेप्टेड मिसाइलों की डेब्री से आग लगी. जेबेल अली पोर्ट पर काला धुआं उठा. अबू धाबी में भी एयरपोर्ट और सिविलियन एरिया प्रभावित हुए. दुबई की बुर्ज खलीफा को सेफ्टी के लिए खाली कराया गया.
दुनिया का सबसे व्यस्त दुबई एयरपोर्ट बंद रहा
दुबई इंटरनेशनल (DXB) और दुबई वर्ल्ड सेंट्रल (DWC) एयरपोर्ट पूरी तरह बंद रहे. जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA) ने एयरस्पेस को ‘प्रिकॉशनरी’ बंद किया. एमिरेट्स ने दुबई से सभी फ्लाइट्स 3 मार्च दोपहर 3 बजे तक सस्पेंड कर दीं, फिर लिमिटेड फ्लाइट्स शुरू कीं. एतिहाद (अबू धाबी) ने 4 मार्च दोपहर 2 बजे तक कमर्शियल फ्लाइट्स बंद रखीं, लेकिन कुछ रेपेट्रिएशन और कार्गो फ्लाइट्स चलाईं. फ्लाइडुबई ने भी लिमिटेड ऑपरेशंस शुरू किए.
6,000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल हुईं. एमिरेट्स (485), एतिहाद (190), फ्लाइडुबई (181) सबसे ज्यादा प्रभावित. इंडिगो और अकासा एयर ने मिडिल ईस्ट रूट्स सस्पेंड किए. हजारों यात्री दुबई, अबू धाबी और दोहा में फंसे हैं. कई होटलों और एयरपोर्ट्स में स्ट्रैंडेड हैं. दुबई एयरपोर्ट्स ने कहा कि शाम से लिमिटेड फ्लाइट्स शुरू होंगी, लेकिन यात्रियों को एयरलाइंस से कन्फर्मेशन लेकर ही एयरपोर्ट जाना है.
PM मोदी ने UAE प्रेसिडेंट से बात की
UAE ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है. तेहरान में अपना एम्बेसी बंद कर दिया और राजदूत को वापस बुला लिया. ईरान के राजदूत को तलब कर ‘नेशनल संप्रभुता का उल्लंघन’ बताया. UAE के फेडरल नेशनल काउंसिल के मेंबर डॉ. अली राशिद अल नुऐमी ने कहा कि गल्फ देशों की ‘पैसिव डिफेंस’ की हद है और सिविलियन पर हमले बर्दाश्त नहीं होंगे. PM मोदी ने UAE प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद से बात की, हमले की निंदा की और भारत की सॉलिडैरिटी जताई.
यूएई की रेलवे कंपनी Etihad Rail ने सऊदी अरब से लौट रहे यूएई के नागरिकों और वहां रहने वाले लोगों की मदद के लिए खास इंतजाम किया. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रीय तैयारियों के तहत, अबू धाबी के इमरजेंसी, क्राइसिस और डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर तीन विशेष पैसेंजर ट्रेनें चलाई गईं.
ये ट्रेनें अल धफरा क्षेत्र के घुवेइफात स्टेशन से चलकर अबू धाबी शहर के अल फाया स्टेशन तक गईं, ताकि सऊदी अरब में फंसे यूएई के लोग सुरक्षित अपने घर लौट सकें. कंपनी ने कहा कि यह कदम दिखाता है कि यूएई का रेलवे नेटवर्क हर स्थिति में काम करने के लिए तैयार है. मुश्किल समय में भी लोगों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का विकल्प देना इसकी प्राथमिकता है.
Etihad Rail ने यह भी बताया कि यह सब देश के नेतृत्व के समर्थन और लंबे समय से की गई योजना और निवेश का नतीजा है. लोगों की सुरक्षा और सुविधा को सबसे ऊपर रखा गया है. कंपनी ने सभी संबंधित विभागों और टीमों का धन्यवाद किया, जिनकी मेहनत से यह मिशन सफल हो पाया.
ईरान में अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मध्य पूर्व में हवाई यात्रा पर गहरा असर पड़ा है. हजारों लोग अलग-अलग देशों के हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं. आने वाले समय में हालात कैसे रहेंगे, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. दुबई, अबू धाबी और बहरीन जैसे बड़े हवाई केंद्रों से आने-जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या देर से चल रही हैं. ये शहर यूरोप, अफ्रीका और एशिया जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माने जाते हैं. इसलिए यहां की रुकावट का असर कई देशों पर पड़ रहा है.
सुरक्षा कारणों से कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. इसके कारण विमानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है या उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं. लंबा रास्ता तय करने से ईंधन की खपत बढ़ रही है और खर्च भी ज्यादा हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो हवाई यात्रा महंगी हो सकती है. ईंधन और संचालन का खर्च बढ़ने से यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ सकता है. जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों और हफ्तों में भी उड़ानों में रुकावट जारी रह सकती है. यदि खाड़ी देशों में जवाबी हमले बढ़ते हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
Source: IOCL
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