Muslim Toppers in Assam 10th Board Exam: असम बोर्ड 10वीं की परीक्षा में इस बार मुस्लिम छात्र-छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है. इसी कड़ी में गुवाहाटी की हलीमा खातून ने डिस्टिंक्शन हासिल कर जिले की टॉपर बनी. उनकी यह शानदार कामयाबी कई मायनों में खास है.
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Assam 10th Result 2026: असम स्टेट स्कूल एजुकेशन बोर्ड ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को 10वीं परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए. इस बार कई छात्र-छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया. लड़कियों के मुकाबले लड़कों ने इस बार बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया. इस बार मैट्रिक में 67.78 फीसदी लड़कों ने कामयाबी हासिल की, जबकि परीक्षा में हिस्सा लेने वाली 63.96 फीसदी लड़कियां पास हुई हैं. टॉप थ्री में दो मुस्लिम छात्राएं भी शामिल हैं. इसी तरह हलीमा खातून नाम की छात्रा गुवाहाटी जिले की टॉपर बनीं.
असम जैसे राज्य में, जहां कई मुस्लिम परिवार आज भी आर्थिक तंगी और संघर्ष के बीच अपने बच्चों का भविष्य संवारने की जंग लड़ रहे हैं, वहीं कुछ कहानियां उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आती हैं. हलीमा खातून की कहानी भी प्रेरणादायक है, जिन्होंने कठिन हालात के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से 2026 के मैट्रिक परीक्षा में डिस्टिंक्शन हासिल कर पूरे दिसपुर इलाके में टॉपर बनकर सबको गौरवान्वित कर दिया.
गुवाहाटी-दिसपुर के दक्षिण गांव स्थित TAB मेमोरियल ट्रस्ट जातीय विद्यालय की छात्रा हलीमा खातून एक बेहद गरीब परिवार से आती हैं. उनका मूल घर बरपेटा में है, लेकिन बेटी की पढ़ाई के लिए उनके पिता ने बड़ा त्याग किया. वे बरपेटा छोड़कर गुवाहाटी आ गए और यहां सड़क किनारे एक छोटा सा होटल खोलकर परिवार का गुजारा करने लगे. साथ ही किराए के एक छोटे से मकान में रहकर अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखी.
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हलीमा जब दसवीं कक्षा में पहुंचीं, तब तक परिवार पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ चुका था. इसी दौरान उनके पिता ने तैय्यबुल्लाह मेमोरियल ट्रस्ट के स्कूल में जाकर मदद की गुहार लगाई. इसके बाद हलीमा का दाखिला TAB मेमोरियल जातीय विद्यालय में हुआ, जहां उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का बेहतरी मौका मिला. पिता ने आर्थिक तंगी के बावजूद हलीमा की पढ़ाई पर ज्यादा जोर दिया.
जिला टॉपर हलीमा का घर देखकर परिस्थितियों का अंदाजा लगाया जा सकता है. एक ही कमरे में खाना बनाना, रहना और पढ़ाई करना, सब कुछ उसी छोटे से स्थान में होता था. इन मुश्किल हालातों के बावजूद हलीमा ने कभी हार नहीं मानी और अपना ध्यान पढ़ाई पर फोकस किया. बातचीत के दौरान हलीमा खातून ने भावुक होते हुए कहा कि आज उनकी सफलता का पूरा क्रेडिट उनके माता-पिता और स्कूल के संचालकों को जाता है. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए अपना गांव छोड़ दिया और उन्हें पढ़ाने के लिए जीतोड़ मेहनत की.
इसके अलावा स्कूल मैनेजमेंट ने भी हलीमा की भरपूर मदद की, जिसकी बदौलत वे आज यह मुकाम हासिल कर सकीं. जब उनसे भविष्य के बारे में पूछा गया, तो हलीमा ने आत्मविश्वास से कहा कि वह आगे चलकर एक सफल इंजीनियर बनना चाहती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं. हलीमा की मां ने भी बातचीत के दौरान भावुक होकर कहा कि आज उनकी मेहनत रंग लाई है. उनकी बेटी ने पूरे इलाके में डिस्टिंक्शन हासिल कर परिवार, स्कूल और समाज का नाम रौशन किया है.
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रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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