Edited by: Vineet Sharan | Updated: Aug 28, 2026, 6:56 AM
Nepal Floods: नेपाल में बर्फ और चट्टानों के खिसकने (हिमस्खलन/भूस्खलन) की घटना ने सभी को चौंका दिया. करीब 400 लोग मारे गए हैं और हजारों लापता हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या इस आपदा को रोका जा सकता था? क्या नेपाल के पास कोई चेतावनी तंत्र ही नहीं था? जवाब है, हां, नेपाल के पास एक शुरुआती चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) था.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी वैज्ञानिकों ने नेपाल के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर हिमालय की ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ पर नज़र रखने के लिए सीमा-पार शुरुआती चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) विकसित किया है.
नए शोध के मुख्य लेखक वांग वेइकाई ने गुरुवार को 'द पेपर' को बताया, सैद्धांतिक रूप से, ऊपरी इलाके में बर्फ और चट्टान के खिसकने का पता चलने पर लगभग 20 मिनट की चेतावनी मिल सकती है. लेकिन उस इलाके में निगरानी उपकरण सीमित हैं, और आपदा का स्रोत नेपाल की तरफ है. जब तक सेंसर किसी असामान्य गतिविधि का पता लगाते हैं, तब तक मडस्लाइड (कीचड़ का बहाव) पहले ही आगे बढ़ चुका होता है.
इस सिस्टम ने पिछले कुछ वर्षों में समय पर अलर्ट जारी किए हैं, जिससे जान-माल का नुकसान प्रभावी ढंग से रोका जा सका है. लेकिन, जब तिब्बत की ओर से आया मलबे का बहाव नेपाल की एक नदी से टकराया, जिससे भयानक अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आ गई और यह चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी तक बहती चली गई. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह आपदा ग्लेशियर की चट्टान के ढहने से हुई है. यह स्पष्ट नहीं है कि क्या चीन-नेपाल शुरुआती चेतावनी प्रणाली ने इस आपदा से पहले किसी असामान्य गतिविधि का पता लगाया था या कोई अलर्ट जारी किया था.
संयोग से, प्रोजेक्ट टीम की ओर से बुधवार को प्रकाशित एक पेपर में चीन की हालिया कई सफलताओं पर प्रकाश डाला गया. इन प्रणालियों ने मिलकर सफलतापूर्वक सात शुरुआती चेतावनियाँ जारी की हैं, जिसमें पिछले साल चीन-नेपाल सीमा पर जारी एक चेतावनी भी शामिल है.
टीम ने 'जर्नल ऑफ़ ग्लेशियोलॉजी एंड जियोक्रायोलॉजी' (एक पीयर-रिव्यूड जर्नल) के लिए लिखे पेपर में कहा, इस सिस्टम में किंगहाई-तिब्बत हिमालयी ग्लेशियल झील निगरानी नेटवर्क, यारलुंग त्सांगपो नदी के सेडोंगपु क्षेत्र में बर्फ के हिमस्खलन की आपदा और चीन-नेपाल सीमा-पार बेसिन में सिरेंमा को ग्लेशियल झील के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणालियां शामिल हैं. (photo credit, IANS)
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