डिजिटल दौर में हिंदी की चुनौतियों, संभावनाओं पर मंथन: लालगंज में 'वैश्वीकरण में हिंदी' विषय पर गोष्ठी, महिल… – Dainik Bhaskar

मिर्जापुर के लालगंज स्थित श्रीमती इंदिरा गांधी राजकीय पीजी कॉलेज में गुरुवार को ‘वैश्वीकरण के दौर में हिंदी : परिवर्तन, चुनौतियां और अंतर्विषयी संवाद’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदी भाषा के बदलते स्वरूप, समकालीन चुनौतियों और विभिन्न विषयों के साथ उसके बढ़ते संबंधों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य वक्ता हिंदी विभाग के डॉ. अनुपम मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में विषयों को गंभीरता से न लेने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे स्थायी और गहन विचार कमजोर पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल मंचों ने संवाद के नए अवसर तो प्रदान किए हैं, लेकिन इससे चिंतन की गहराई भी प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, समाज में सतही विमर्श की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
भाषा के विकास में बाजार और सत्ता की भूमिका महत्वपूर्ण
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भाषा का विकास बाजार, विज्ञापन और सत्ता के प्रभाव से भी संचालित होता है। उन्होंने बताया कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में दूसरी भाषाओं के प्रभाव ने हिंदी समेत भारतीय भाषाओं के स्वरूप को प्रभावित किया है, जिससे भाषाई विकास की नई दिशाएं बनी हैं।
ज्ञान-विज्ञान से संवाद स्थापित कर रही हिंदी
विशिष्ट वक्ता डॉ. अंबेश्वरी पांडेय ने कहा कि हिंदी अपनी समावेशी प्रकृति और आधुनिक विषयवस्तु के कारण लगातार नए आयाम प्राप्त कर रही है। उन्होंने बताया कि हिंदी ज्ञान-विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित कर रही है और अपने दायरे का विस्तार कर रही है।
महिलाओं के सशक्तिकरण में हिंदी की भूमिका
समाजशास्त्र विभाग की डॉ. शिवांगी पांडेय ने हिंदी की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा ने महिलाओं में आत्मसम्मान, जागरूकता और नेतृत्व क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदी ने महिलाओं को ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भी जागरूक बनाया है।
वैज्ञानिक शब्दावली से समृद्ध हुई हिंदी
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विज्ञान विभाग के डॉ. रामप्रकाश पाल ने कहा कि वैज्ञानिक अवधारणाओं और तकनीकी शब्दावली के समावेश से हिंदी और अधिक समृद्ध हुई है। उन्होंने हिंदी को लोकतांत्रिक चेतना, नवसृजन और सामाजिक एकता की भाषा बताते हुए कहा कि इसमें समाज को जोड़ने की व्यापक क्षमता मौजूद है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता
विचार गोष्ठी में सुशील द्विवेदी, बालकृष्ण, आशुतोष दुबे, शमला पटेल सहित अनेक शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के भविष्य, उसके विस्तार और समकालीन संदर्भों में उसकी उपयोगिता पर सार्थक चर्चा हुई।
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