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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रमादित्य के शॉर्ट रिफिट और ड्राई डॉकिंग (SRDD) के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक बड़ा करार किया है. यह करार 30 नवंबर 2024 को ₹1207.5 करोड़ की लागत पर साइन हुआ.
INS विक्रमादित्य भारतीय नौसेना का प्रमुख विमानवाहक पोत है, जिसे नवंबर 2013 में नौसेना में शामिल किया गया था. अब इसके रिफिट (मरम्मत और उन्नयन) के बाद यह नौसेना के सक्रिय बेड़े में वापस शामिल होगा और पहले से अधिक आधुनिक और उन्नत युद्ध क्षमताओं के साथ काम करेगा.
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प्रोजेक्ट की खास बातें
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड को इस प्रोजेक्ट के जरिए एक मेन्टेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) हब के रूप में विकसित किया जाएगा. इसमें करीब 50 एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) कंपनियों की भागीदारी होगी. यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर 3500 से अधिक लोगों को रोजगार के मौके देगा.
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आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
यह प्रोजेक्ट न केवल भारतीय नौसेना की ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को भी मजबूत करेगा. इसके जरिए देश में औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में भारत को और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा.
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क्यों है यह प्रोजेक्ट अहम?
INS विक्रमादित्य भारतीय नौसेना के लिए एक रणनीतिक संपत्ति है, और इसकी मरम्मत और उन्नयन से नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा. साथ ही, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड को इस प्रोजेक्ट से नई पहचान मिलेगी. यह कदम भारत के रक्षा क्षेत्र को स्वदेशी तकनीक और संसाधनों पर निर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है.
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INS विक्रमादित्य
INS विक्रमादित्य भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसे 16 नवंबर 2013 को नौसेना में शामिल किया गया था. यह 45,000 टन वजनी युद्धपोत पहले रूस के ‘एडमिरल गोर्शकोव’ के नाम से जाना जाता था और इसे भारत ने रूस से खरीदा और मॉडिफाई किया. इस पर मिग-29K फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर्स तैनात होते हैं. INS विक्रमादित्य भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और नौसेना की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है.
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