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भारत के खिलाफ एक बड़े प्रोपेगेंडा ऑपरेशन का खुलासा हुआ है, जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI), सेना और मीडिया नेटवर्क मिलकर फॉल्स फ्लैग नैरेटिव गढ़ रहे हैं. खुफिया इनपुट्स के मुताबिक पिछले 48 घंटों में इस साजिश को तेजी से फैलाया गया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं.
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की ISI ने एक सुनियोजित फॉल्स फ्लैग नैरेटिव तैयार किया है. इस नैरेटिव में दावा किया गया है कि भारत में जल्द ही कोई आतंकी हमला हो सकता है, जिसे पहले से ही फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन करार दिया जा रहा है. इस तरह की रणनीति का मकसद घटना से पहले ही भ्रम फैलाना है. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है. सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही हैं.
इस नैरेटिव को पाकिस्तान के बड़े मीडिया संस्थानों जैसे डॉन (Dawn) और जियो न्यूज़ (Geo News) के जरिए फैलाया गया. खबरों को प्रिंट, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ चलाया गया. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट्स के जरिए इसे तेजी से वायरल किया गया। यह एक क्लासिक सूचना युद्ध (Information Warfare) का उदाहरण माना जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार इस पूरी साजिश को ISI के DG-M मेजर जनरल मुहम्मद मुश्ताक अली ने तैयार किया. इसके बाद इसे पाकिस्तान के मीडिया में प्लांट किया गया. जैसे ही यह खबर सामने आई, सेना के X Corps और Inter-Services Public Relations (ISPR) ने इसे बड़े स्तर पर फैलाने की रणनीति लागू कर दी.
इस अभियान को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल आमेर अहसान नवाज़ और ISPR के DG ब्रावो मेजर जनरल ज़ुल्फ़िकार अली भट्टी ने संभाली. इनके नेतृत्व में बॉट नेटवर्क और सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए बड़े पैमाने पर यह नैरेटिव फैलाया गया. इससे यह साफ होता है कि यह एक संगठित और सरकारी स्तर का अभियान है.
इस पूरे अभियान का समय भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह सब कुछ पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले किया जा रहा है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान पहले से ही माहौल तैयार कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित घटना के बाद अपने दावे को सही साबित किया जा सके.
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया था. पहलगाम हमले से करीब 23 दिन पहले पाकिस्तान ने इसी तरह के दावे किए थे. बाद में उसी नैरेटिव को सबूत के तौर पर पेश करने की कोशिश की गई. हालांकि, जब तीन आतंकियों को मार गिराया गया तो सच्चाई सामने आ गई.
जांच में पता चला कि मारे गए आतंकियों में से दो के पास पाकिस्तानी CNIC कार्ड थे. इससे पाकिस्तान के दावे कमजोर पड़ गए और उसका प्रोपेगेंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब हो गया. इसके बावजूद पाकिस्तान ने अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया और अब फिर से वही तरीका अपनाया जा रहा है.
पिछले 11 महीनों में भारतीय सुरक्षा बलों ने 34 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया है. यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों की सटीक जानकारी के आधार पर की गई. हालांकि, अब भी 40 से ज्यादा आतंकी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय बताए जा रहे हैं. इनमें लश्कर-ए-तयबा और जैश जैसे संगठनों के सदस्य शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक हाल के महीनों में ISI अधिकारियों और आतंकी संगठनों के बीच कई अहम बैठकें हुई हैं. खासतौर पर ब्रिगेडियर रिजवान शरीफ की इन संगठनों के साथ बैठकों की जानकारी भारतीय एजेंसियों को मिली है. इससे यह संकेत मिलता है कि जमीन पर भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान का सूचना तंत्र काफी संगठित है. इसमें ISI के अलावा ISPR, सूचना मंत्रालय और पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) और पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) जैसी एजेंसियां शामिल हैं. इनका मकसद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धारणा बनाना है. भारत की एजेंसियां इस पूरे हाइब्रिड वॉरफेयर मॉडल पर नजर बनाए हुए हैं और हर स्तर पर सतर्क है.
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