अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग आज 27वें दिन भी जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए साफ कहा, ‘हमने यह युद्ध जीत लिया है. ईरान पूरी तरह कमजोर हो चुका है और अब परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत हो गया है.’
ट्रंप ने बताया कि ईरान समझौता करने के लिए तैयार है और दोनों तरफ बातचीत चल रही है. इन बातचीत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकोफ शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका को एक ‘बहुत बड़ा तोहफा’ दिया है, जो तेल और गैस से जुड़ा है. ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत नाकाम रही तो ईरान के पावर प्लांट्स पर दोबारा हमला किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल 5 दिन का समय दिया गया है.
ईरान की तरफ से इन बातचीत का खुलकर इनकार किया गया है, लेकिन कुछ सूत्रों के मुताबिक मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है. पाकिस्तान ने बातचीत होस्ट करने की पेशकश की है और उसके आर्मी चीफ को मुख्य मध्यस्थ बताया जा रहा है.
शांति वार्ता की चर्चाओं के बीच हमले जारी
आज हिजबुल्लाह ने इजरायल के हाइफा और नाहारिया पर 30 से ज्यादा रॉकेट दागे. इसके अलावा लेबनान से रॉकेट और ड्रोन हमलों में इजरायल में एक महिला की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए. ईरान ने इजरायल के एयरोस्पेस और हथियार फैक्टरियों पर ड्रोन हमले किए, जबकि इजरायल ने शिराज एयरपोर्ट समेत ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए. शिराज में धुएं के गुबार उठते दिखे.
तेल अवीव में मिसाइल हमले से तीन इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, कई लोग घायल हुए. कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक में ड्रोन हमले से आग लग गई. सऊदी अरब और कुवैत ने कई ड्रोन और मिसाइलों को रोक लिया.
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
जंग की वजह से ब्रेंट क्रूड एक समय 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, लेकिन ट्रंप के बातचीत वाले बयान के बाद कीमतें 6-6.5% गिरकर 94-97 डॉलर के आसपास आ गईं. फिर भी युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर हैं. हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद जैसी स्थिति में है, हालांकि ईरान ने कहा है कि गैर-दुश्मन जहाजों को पास करने की इजाजत है.
मिडिल ईस्ट वॉर में भारत की स्थिति क्या है?
भारत इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखे हुए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल ट्रंप से फोन पर बात की और इलाके में जल्द शांति तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने की अपील की. भारत की चिंता अपनी ऊर्जा सुरक्षा, तेल सप्लाई और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर है.
अमेरिका-ईरान जंग की ताजा अपडेट्स क्या है?
अमेरिका ने मध्य पूर्व में 2000 अतिरिक्त सैनिक भेजने का फैसला किया है. इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बना रहा है. ईरान में अब तक 1500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, जबकि लेबनान में भी 1000 से अधिक.
स्थिति अभी भी बहुत संवेदनशील है. ट्रंप का कहना है कि ईरान अब समझदारी दिखा रहा है, लेकिन मैदान में हमले जारी हैं. दुनिया भर के देश इस जंग के जल्द खत्म होने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि इससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के दक्षिणी शहर शिराज में एक बड़े मिसाइल बेस को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए जाने की खबर सामने आई है. एक अमेरिकी थिंक टैंक/संस्थान के अनुसार, इन हमलों में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को टारगेट किया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बेस ईरान के प्रमुख मिसाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा माना जाता है, जहां मिसाइलों का निर्माण, भंडारण या संचालन किया जाता था. पहले भी इस क्षेत्र में ऐसे सैन्य ठिकानों पर हमले की पुष्टि हो चुकी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमलों का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में उसकी सैन्य ताकत को सीमित करना है. हालांकि, हमले से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर आधिकारिक तौर पर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को फ्रांस पहुंचे, जहां वे G7 फॉरेन मिनिस्टर्स मीटिंग में हिस्सा लेंगे. इस बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संकट पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. बैठक का मुख्य फोकस पश्चिमी एशिया की स्थिति को स्थिर करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है. खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता जताई जा रही है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है.
G7 देशों के विदेश मंत्री इस बात पर विचार करेंगे कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को कैसे खुला और सुरक्षित रखा जाए, ताकि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर कोई असर न पड़े. मौजूदा हालात में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. भारत की भागीदारी इस बैठक में इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि देश ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में भारत की कोशिश होगी कि क्षेत्र में शांति बनी रहे और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित न हो.
Source: IOCL
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