Karnal News: करनाल में हरियाली पर यह वार केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर गंभीर चोट है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या दोषियों को वास्तव में सजा मिल पाती है या नहीं.
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Karnal News: जहां एक ओर सरकार और प्रशासन “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ” जैसे अभियानों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, वहीं करनाल के आंसल क्षेत्र से आई एक खबर ने इन प्रयासों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यहां सैकड़ों पेड़ों को कथित तौर पर छंटाई के नाम पर बेरहमी से काट दिया गया, जिससे पूरे इलाके में चिंता और रोष का माहौल है.
छंटाई के नाम पर कटाई का खेल
स्थानीय लोगों के अनुसार, पेड़ों की सामान्य छंटाई की आड़ में उन्हें इस कदर काटा गया कि उनकी दोबारा वृद्धि तक मुश्किल हो गई. इतना ही नहीं, कटे हुए पेड़ों की लकड़ियों को ट्रॉलियों में भरकर ले जाया गया. जब लोगों ने इसका विरोध किया तो संबंधित व्यक्तियों ने अनुमति होने का दावा किया, लेकिन जांच में यह दावा संदिग्ध नजर आया.
स्थानीय निवासी का बयान
आंसल निवासी आशीष मित्तल ने बताया कि एक सप्ताह बाहर रहने के बाद लौटने पर उन्होंने इलाके में पेड़ों की हालत देखकर हैरानी जताई. पूछताछ करने पर बताया गया कि यह केवल छंटाई है, जबकि असल में पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया था. विरोध करने पर भी स्पष्ट अनुमति नहीं दिखाई गई. बाद में सामने आया कि जो अनुमति दिखाई जा रही थी, वह 2024 तक ही मान्य थी.
कार्रवाई की मांग और आशंका
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने इस पूरे घटनाक्रम का विरोध करते हुए वन विभाग और पुलिस को सूचित किया. निवासियों की मांग है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो. साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में इस मामले को दबाने की कोशिश हो सकती है, इसलिए उन्होंने मीडिया का सहारा लिया है.
वन विभाग और पुलिस की जांच
मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारी साहिल ने बताया कि सूचना मिलने के बाद टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची. प्रारंभिक जांच में अवैध कटाई के संकेत मिले हैं. पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जो अनुमति दिखाई गई, वह पुरानी है और वर्तमान नियमों के अनुरूप नहीं है. मामले की गहन जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.
बहरहाल करनाल में हरियाली पर यह वार केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर गंभीर चोट है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या दोषियों को वास्तव में सजा मिल पाती है या नहीं.
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INPUT: KAMARJEET SINGH
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