Mahashivratri Vrat Katha: पाना है महाशिवरात्रि व्रत का पूरा फल तो जरूर पढ़ें ये रोचक कथा – Asianet News Hindi

MahaShivratri Story In Hindi: महाशिवरात्रि शिव भक्तों का सबसे बड़ा त्योहार है। इस पर्व का इंतजार इन्हें साल भर रहता है। इस बार महाशिवरात्रि पर्व 15 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भक्त अलग-अलग प्रकार से महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इस दिन अधिकांश लोग व्रत भी करते हैं। व्रत का पूरा फल पाने के लिए महाशिवरात्रि की कथा सुननी भी जरूरी है। आगे जानें महाशिवरात्रि व्रत की कथा…

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– किसी समय काशी में गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था। वह जानवरों का शिकार करके अपना घर-परिवार चलाता था। एक बार महाशिवरात्रि के दिन गुरुद्रुह शिकार करने जंगल में गया। दिन भर शिकार न मिलने से वो उदास हो गया और रात में एक बिल्व वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया।

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– उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग भी था। गुरुद्रुह ने देखा एक हिरनी उसके नजदीक आ रही है। उसे मारने के लिए जैसे ही गुरुद्रुह ने धनुष पर तीर चढ़ाया तो बिल्ववृक्ष के कुछ पत्ते शिवलिंग पर गिर गए। इससे महाशिवरात्रि के प्रथम पहर में उससे अनजाने में शिवजी पूजा हो गई।
– शिकारी को देख हिरणी ने कहा ‘मुझे अभी मत मारो, मेरे बच्चे मेरा रास्ता देख रहे हैं। मैं अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर छोड़कर तुम्हारे पास लौट आऊँगी। गुरुद्रुह ने दया करके उस हिरनी को जीवित छोड़ दिया। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद हिरनी की बहन वहां आई।
– इस बार भी जैसे ही शिकारी ने तीर अपने धनुष पर लगाया, उससे अनजाने में शिवलिंग की पूजा हो गई। हिरनी की बहन भी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने का बोलकर वहां से चली गई। इसके कुछ देर बाद हिरण अपनी हिरणी और बच्चों को खोजता हुआ वहां आया।
– इस बार भी वही सब हुआ और तीसरे पहर में भी गुरुद्रुह से शिवजी की पूजा हो गई। कुछ देर बाद दोनों हिरनी और वह हिरन अपनी प्रतिज्ञा अनुसार स्वयं गुरुद्रुह के पास आ गए। उन्हें मारने के लिए गुरुद्रुह ने धनुष पर बाण चढ़ाया तो चौथे पहर में भी शिवजी की पूजा हो गई।
– गुरुद्रुह ने दिनभर से कुछ भी खाया नहीं था। इस तरह अंजाने में उससे महाशिवरात्रि का व्रत-पूजा भी हो गई, जिससे उसकी बुद्धि निर्मल हो गई। बुद्धि निर्मल होते ही उसने बेजुबान प्राणियों के मारने का विचार त्याग दिया। तभी उससे प्रसन्न होकर महादेव वहां स्वयं प्रकट हो गए।
– शिवजी ने गुरुद्रुह को वरदान दिया कि ‘त्रेतायुग में भगवान श्रीराम तुमसे मिलेंगे और तुम्हें अपना मित्र बनाकर सम्मान देंगे। यही शिकारी त्रेतायुग में निषादराज बना। महाशिवरात्रि पर जो ये कथा सुनता है, उसका व्रत पूर्ण हो जाता है और उसकी हर इच्छा भी पूरी हो जाती है।

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